किशनगंज: बच्चों की जन्मजात विकृति का होगा मुफ्त इलाज

किशनगंज जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक बेहद महत्वपूर्ण पहल की है। किशनगंज में बच्चों का निःशुल्क इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, जन्मजात शारीरिक विकृति से प्रभावित बच्चों के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत यह अभियान 14 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा, ताकि किसी भी जरूरतमंद बच्चे को इलाज से वंचित न रहना पड़े।
इस विशेष अभियान का मुख्य लक्ष्य कटे हुए होंठ, कटे हुए तालू, टंग-टाई और जन्मजात टेढ़े पैर जैसी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों की पहचान करना और उन्हें मुफ्त शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के लिए जोड़ना है।
किन बीमारियों का होगा मुफ्त उपचार?
स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान के दायरे में वे बच्चे आएंगे जो निम्नलिखित जन्मजात समस्याओं से प्रभावित हैं:
- कटे हुए होंठ (Cleft Lip)
- कटे हुए तालू (Cleft Palate)
- टंग-टाई (Tongue-tie)
- जन्मजात टेढ़े पैर (Clubfoot)
कैसे की जाएगी बच्चों की पहचान?
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी स्तर पर काम करने की योजना बनाई है। चलंत चिकित्सा दल (Mobile Medical Teams) लगातार आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण करेंगे ताकि प्रभावित बच्चों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही, आशा कार्यकर्ताओं को भी अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे बच्चों को चिह्नित करने और स्वास्थ्य विभाग को सूचना देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पहचान के बाद, सर्जरी से पहले बच्चों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की जाएगी, जिसमें शामिल हैं:
- हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) की जांच
- डब्ल्यूबीसी (WBC) और प्लेटलेट्स की जांच
- उम्र के अनुसार वजन की जांच
यदि किसी बच्चे में कोई संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या पाई जाती है, तो सर्जरी से पहले उसका समुचित उपचार किया जाएगा।
प्रशासन की मुस्तैदी और प्रशिक्षण
अभियान की सफलता के लिए ठाकुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें न केवल विकृतियों की पहचान करना सिखाया गया है, बल्कि अभिभावकों को जागरूक करने और उन्हें उपचार के लिए प्रेरित करने के गुर भी सिखाए गए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। वहीं, जिलाधिकारी नवीन कुमार ने निर्देश दिया है कि सभी संबंधित कर्मी आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि अभियान का लाभ हर जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचे।
मरीजों की सुविधा के लिए 102 एंबुलेंस की व्यवस्था और आरबीएसके के तहत प्री-ऑथराइजेशन प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को भी सुगम बनाया जा रहा है, ताकि आर्थिक तंगी इलाज के आड़े न आए।