किशनगंज में बीमारियों पर प्रहार: शुगर और बीपी की जांच में बड़ी सफलता, कैंसर स्क्रीनिंग पर जोर

Ghazala Saheb21 October 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज में बीमारियों पर प्रहार: शुगर और बीपी की जांच में बड़ी सफलता, कैंसर स्क्रीनिंग पर जोर

किशनगंज जिले में बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश पर जिले में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान के लिए एक व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों की जांच कर उन्हें समय पर चिकित्सकीय परामर्श और सही उपचार से जोड़ना है ताकि बीमारियों को गंभीर होने से रोका जा सके।

जांच के आंकड़ों में बड़ी उपलब्धि

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने गैर-संचारी रोगों की समीक्षा के दौरान बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में काम तेजी से चल रहा है। कुल 6,32,100 लोगों के स्क्रीनिंग लक्ष्य के मुकाबले, उच्च रक्तचाप और मधुमेह की जांच में काफी अच्छी प्रगति देखी गई है।

  • उच्च रक्तचाप (Hypertension): अब तक 4,79,150 लोगों की जांच की जा चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 75.8 प्रतिशत है।
  • मधुमेह (Diabetes): 4,78,327 लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 75.67 प्रतिशत है।
  • COPD: 2,81,916 लोगों की स्क्रीनिंग हुई है, जो लक्ष्य का 44.6 प्रतिशत है।
  • एनएएफएलडी (NAFLD): नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के लिए 2,58,649 लोगों की जांच की गई है।

कैंसर स्क्रीनिंग में रफ्तार बढ़ाने की जरूरत

जहाँ एक ओर बीपी और शुगर की जांच में लक्ष्य के करीब पहुँचा जा सका है, वहीं कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की स्क्रीनिंग में अभी काफी काम बाकी है। स्वास्थ्य विभाग ने माना है कि कैंसर की जांच में तेजी लाने की सख्त जरूरत है।

  • ओरल कैंसर: अब तक 63,372 लोगों की जांच हुई है, जो मात्र 10.03 प्रतिशत लक्ष्य है।
  • सर्वाइकल कैंसर: इसकी जांच केवल 24,085 लोगों की हुई है, जो लक्ष्य का 3.81 प्रतिशत है।

स्वास्थ्यकर्मियों को मिल रहा विशेष प्रशिक्षण

अभियान को और अधिक प्रभावी और सटीक बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। एनसीडीओ डॉ. उर्मिला कुमारी ने पीएचसी किशनगंज में स्वास्थ्यकर्मियों को टीबी, एनीमिया, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग और लैंगिक उत्पीड़न जैसे संवेदनशील विषयों पर प्रशिक्षण दिया।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पहचानने, मरीजों को उचित परामर्श देने और जरूरतमंद मरीजों को तुरंत स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में सक्षम बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर बीमारी की पहचान होने से भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विभाग का पूरा जोर अब उन लोगों तक पहुंचने पर है जो अब तक इस जांच प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं।

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