किशनगंज जेल में टीबी के खिलाफ महाअभियान: हैंडहेल्ड एक्स-रे से जांच

किशनगंज मंडल कारा में बंदियों की टीबी जांच के लिए हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जानें क्या है पूरा मामला।

Ghazala Saheb23 October 20263 min read0 viewsBihar
किशनगंज जेल में टीबी के खिलाफ महाअभियान: हैंडहेल्ड एक्स-रे से जांच

किशनगंज के मंडल कारा में बंदियों को टीबी जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत जेल के भीतर एक विशेष स्वास्थ्य शिविर चलाया जा रहा है, जिसमें आधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बंदियों की स्क्रीनिंग करना और संभावित मरीजों की जल्द पहचान कर उन्हें उचित उपचार मुहैया कराना है।

हैंडहेल्ड एक्स-रे और टीपीटी पर विशेष जोर

स्वास्थ्य विभाग की इस विशेष पहल के तहत, जेल के बंदियों की हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से स्क्रीनिंग की जा रही है। इससे न केवल बीमारी का पता लगाना आसान हो गया है, बल्कि जेल के भीतर संक्रमण फैलने के जोखिम को भी कम किया जा रहा है। इसके साथ ही, जो बंदी टीबी के उच्च जोखिम में हैं, उन्हें टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) के तहत 3एचपी दवा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अभियान के आंकड़े और प्रदर्शन

डीपीएम डॉ. मुनाजिम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिले में 2 जुलाई से 13 अक्टूबर तक कुल 5,32,220 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इसमें से 1,87,205 लोगों को वल्नरेबल ग्रुप (जोखिम वाले समूह) के रूप में चिह्नित किया गया है। इस पूरी अवधि के दौरान अब तक कुल 44,186 एक्स-रे जांचें पूरी की जा चुकी हैं।

हालांकि, जांच की रफ्तार को लेकर कुछ आंकड़े चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं:

  • सितंबर का प्रदर्शन: सितंबर में 18,500 एक्स-रे के लक्ष्य के मुकाबले केवल 11,268 जांचें ही हो सकीं, जो कि 61 प्रतिशत की उपलब्धि है।
  • अक्टूबर की स्थिति: 1 से 12 अक्टूबर के बीच 7,250 के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 2,680 जांचें ही दर्ज की जा सकी हैं।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए अभियान की गति बढ़ाने की आवश्यकता है।

उपचार और रोकथाम में मिली बड़ी सफलता

एक ओर जहां स्क्रीनिंग की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर उपचार के मामले में विभाग ने काफी अच्छी प्रगति दिखाई है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, टीपीटी (TPT) के क्षेत्र में 3,290 पात्र व्यक्तियों को उपचार देने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 2,950 व्यक्तियों ने अपना उपचार सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे टीपीटी की उपलब्धि दर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इसके अलावा, डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के तहत भी बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं। कुल 620 में से 609 मामलों में सेवा पूरी की जा चुकी है, जबकि केवल 11 मामले ही लंबित हैं।

प्रशासनिक निगरानी और निर्देश

अभियान की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने इस बात पर जोर दिया कि बीमारी की शुरुआती पहचान, चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार की निरंतरता ही इस लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने स्क्रीनिंग, उपचार और बचाव संबंधी सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता बताई है।

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