किशनगंज जेल में टीबी मुक्त अभियान: कैदियों की हो रही विशेष जांच
किशनगंज मंडल जेल में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कैदियों की विशेष जांच और बचाव उपचार किया जा रहा है।

किशनगंज मंडल जेल में 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जेल के भीतर कैदियों के बीच टीबी के संभावित मामलों की पहचान करना और उन्हें टीबी निवारक उपचार (TPT) प्रदान करना है।
तकनीक और उपचार का समन्वय
जांच की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए इस अभियान में हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। जिला टीबी केंद्र और अन्य सहयोगी संस्थाओं की देखरेख में, जो कैदी इसके लिए पात्र हैं, उन्हें 3HP-आधारित निवारक उपचार दिया जा रहा है। यह विशेष अभियान 23 मार्च 2026 को शुरू हुआ था और 3 नवंबर 2026 तक चलने की योजना है।
अभियान की प्रगति और महत्वपूर्ण आंकड़े
जिला टीबी केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 2 जुलाई से 13 अक्टूबर 2026 के बीच जिले में स्वास्थ्य संबंधी बड़ी प्रगति देखी गई है। अभियान के तहत किए गए कार्यों का विवरण इस प्रकार है:
- कुल स्क्रीनिंग: जिले में अब तक 5,32,220 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
- संवेदनशील समूह: कुल स्क्रीनिंग में से 1,87,205 लोग (लगभग 35%) संवेदनशील श्रेणी के अंतर्गत पाए गए।
- एक्स-रे परीक्षण: अब तक कुल 44,186 एक्स-रे किए गए हैं।
- टीपीटी (TPT) सफलता: निवारक उपचार के मामले में जिले ने 97 प्रतिशत की शानदार सफलता दर हासिल की है। 3,290 लाभार्थियों के लक्ष्य में से 2,950 लोग अपना उपचार सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।
हालांकि, सितंबर में एक्स-रे के लक्ष्य के मुकाबले 61 प्रतिशत और अक्टूबर के शुरुआती दिनों में 37 प्रतिशत की उपलब्धि दर्ज की गई है, जिस पर प्रशासन का ध्यान है।
अधिकारियों के निर्देश और लक्ष्य
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। अधिकारियों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं:
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने जोर देकर कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करना और लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करना अत्यंत आवश्यक है।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बीमारी के शीघ्र निदान और उपचार प्रोटोकॉल की निरंतर निगरानी करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, डॉ. मंजर आलम (जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर) ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए संस्थागत प्रयासों के साथ-साथ सामुदायिक जागरूकता का होना भी अनिवार्य है।