गर्भ से सुरक्षित प्रसव तक: किशनगंज में मजबूत होगा स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र

Ghazala Saheb8 October 20262 min read0 viewsBihar
गर्भ से सुरक्षित प्रसव तक: किशनगंज में मजबूत होगा स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र

किशनगंज जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी पहल शुरू की है। जिलाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश पर जिले में स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र को अटूट बनाने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे गर्भधारण से लेकर सुरक्षित प्रसव और नवजात की देखभाल तक हर चरण पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।

इसी अभियान के तहत गुरुवार को कोचाधामन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम (ANM) को पांच प्रकार के रजिस्टरों को अद्यतन (update) करने के लिए प्रशिक्षित करना है।

डिजिटल माध्यम से होगी हर लाभार्थी की पहचान

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि जिले की एक भी गर्भवती महिला, नवजात बच्चा या योग्य दंपत्ति स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे से बाहर न रहे। कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और योग्य दंपतियों की पहचान कर उनका सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इस पूरी जानकारी को डिजिटल माध्यम से दर्ज करने पर बल दिया जा रहा है, ताकि डेटा की सटीकता बनी रहे और समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।

समय पर गर्भावस्था की पहचान होने से न केवल प्रसव पूर्व जांच (ANC) सुनिश्चित की जा सकेगी, बल्कि पोषण संबंधी परामर्श और संभावित जोखिमों की पहचान करना भी आसान हो जाएगा। इससे संस्थागत प्रसव (अस्पताल में प्रसव) की तैयारी में भी काफी मदद मिलेगी। वहीं, नवजात की समय पर पहचान होने से जन्म के बाद की जरूरी देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी भी सुलभ होगी।

प्रशासन की प्राथमिकता: लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं

जिलाधिकारी नवीन कुमार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना, सुरक्षित प्रसव कराना और मां व नवजात को आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने भी इस अभियान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भावस्था की शुरुआत से ही नियमित निगरानी अनिवार्य है। आशा और एएनएम के माध्यम से महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने तथा उन्हें संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

'गृह प्रसव मुक्त पंचायत' का लक्ष्य

इस पूरी कवायद को 'गृह प्रसव मुक्त पंचायत' के लक्ष्य से भी जोड़ा गया है। सिविल सर्जन के अनुसार, ये पांच रजिस्टर महज कागजी दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि जरूरतमंद लाभार्थियों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम हैं। इन रजिस्टरों के अद्यतन और डिजिटल निगरानी से स्वास्थ्य सेवाओं की कड़ी और अधिक मजबूत होगी, जिससे जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।

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