किशनगंज में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित मातृत्व की ओर बढ़ते कदम

किशनगंज में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच की गई ताकि जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान हो सके।

Ghazala Saheb22 October 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित मातृत्व की ओर बढ़ते कदम

किशनगंज में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गुरुवार को सदर अस्पताल सहित जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में प्रसवपूर्व स्वास्थ्य जांच की गई।

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान करना है ताकि उचित उपचार और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके। अभियान के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य का व्यापक आकलन किया गया, जिसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • रक्तचाप (Blood Pressure) की जांच
  • हीमोग्लोबिन का स्तर
  • भ्रूण की वृद्धि का आकलन
  • गर्भावस्था से जुड़ी संभावित जटिलताएं

जांच के दौरान महिलाओं को आवश्यकतानुसार अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, ताकि गर्भावस्था की स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

सदर अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. शबनम यास्मीन ने गर्भवती महिलाओं को कुछ गंभीर लक्षणों के प्रति विशेष रूप से सचेत रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि यदि किसी महिला को निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो उसे तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए:

  • अचानक रक्तस्राव होना
  • तेज सिरदर्द महसूस होना
  • धुंधला दिखाई देना
  • सांस लेने में कठिनाई होना

अधिकारियों के निर्देश और स्वास्थ्य विभाग की अपील

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भावस्था की शुरुआत से ही नियमित प्रसवपूर्व जांच अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान होती है, तो संबंधित महिला की स्थिति के अनुसार उचित उपचार, निरंतर निगरानी और समय पर रेफरल सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

वहीं, जिलाधिकारी नवीन कुमार ने स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि गर्भवती महिलाओं को जांच, परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च जोखिम वाली महिलाओं के उपचार और रेफरल की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Share:

Comments

Leave a comment