किशनगंज में धान खरीद का लक्ष्य बढ़ा: 83 हजार मीट्रिक टन से अधिक की तैयारी
किशनगंज में इस वर्ष 83,022 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य है। पिछले साल के मुकाबले यह 5,479 मीट्रिक टन अधिक है। जानें किसानों के लिए नए नियम।

किशनगंज जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान अधिप्राप्ति (खरीद) की प्रक्रिया को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस वर्ष जिले में धान खरीद का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में काफी बढ़ा दिया गया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पिछले साल के मुकाबले बढ़ा लक्ष्य
जिलाधिकारी नवीन कुमार की अध्यक्षता में पैक्स अध्यक्षों के साथ आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में धान खरीद की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि इस साल जिले में कुल 83,022 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष यह लक्ष्य 77,543 मीट्रिक टन था, जिसका अर्थ है कि इस बार 5,479 मीट्रिक टन अधिक धान की खरीदारी की जाएगी।
निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए समितियों को कुल 56,324 मीट्रिक टन सीएमआर (चावल) जमा करना होगा। इस लक्ष्य का विवरण इस प्रकार है:
- सामान्य उसना चावल: 49,566 मीट्रिक टन
- सामान्य अरवा चावल: 6,759 मीट्रिक टन
किसानों के लिए खरीदारी के नियम और सीमा
धान की खरीद को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए कृषि विभाग के पोर्टल (www.dbtagriculture.bihar.gov.in/Agristack) का उपयोग किया जाएगा। खरीदारी केवल उन्हीं किसानों की होगी जिनका भूमि विवरण पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड हो चुका है।
खरीद की सीमा और मानक भी तय कर दिए गए हैं:
- रैयती किसान: अधिकतम 250 क्विंटल धान की खरीद।
- गैर रैयती किसान: अधिकतम 100 क्विंटल धान की खरीद।
- मानक: जिले में प्रति हेक्टेयर औसतन 39 क्विंटल धान अधिप्राप्ति का मानक रखा गया है।
पैक्स और व्यापार मंडलवार खरीद का लक्ष्य क्षेत्र में धान उत्पादन के वास्तविक आंकड़ों के आधार पर तय किया जाएगा।
तकनीकी समस्याओं का होगा समाधान
बैठक के दौरान दिघलबैंक के पैक्स अध्यक्षों ने एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसानों के भूमि विवरण अपलोड करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों से जिलाधिकारी को अवगत कराया। इस पर डीएम ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी इन समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे अधिक से अधिक किसानों का निबंधन जल्द से जल्द पूरा कराएं।
इसके अलावा, बैठक में मिलिंग, हथालन और परिवहन की दरों के पुनरीक्षण और समितियों की लंबित राशि के भुगतान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक को निर्देश दिया कि पिछले वर्षों की लंबित राशि का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए ताकि समितियों को कोई परेशानी न हो।