सड़क हादसे के शिकार अब नहीं होंगे बेबस, किशनगंज में मिलेगा 1.50 लाख तक का मुफ्त इलाज!
किशनगंज में पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल रहा है। जानें कैसे उठाएं इस सुविधा का लाभ।

बिहार के किशनगंज जिले में सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों को इलाज के लिए पैसों की तंगी के कारण जूझना नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री (PM) राहत योजना के माध्यम से जिले में दुर्घटना पीड़ितों को 7 दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के जीवन बचाने में बाधा न बने।
गरीब परिवार को मिला योजना का बड़ा सहारा
इस योजना की सफलता का एक ताजा उदाहरण बहादुरगंज ब्लॉक के लोहगड़ा गांव में देखने को मिला। बीते 6 नवंबर को एक स्थानीय निवासी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी और अस्पताल का भारी-भरकम खर्च उठाना उनके लिए नामुमकिन लग रहा था। लेकिन पीएम राहत योजना के तहत, उन्हें बिना किसी वित्तीय बोझ के 1.50 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिला, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली।
कैसे काम करती है यह योजना?
जिला समन्वयक पंकज कुमार ने जानकारी दी कि अब तक किशनगंज में तीन दुर्घटना पीड़ितों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:
- पंजीकरण: पीड़ितों का विवरण निर्धारित निजी अस्पतालों में TMS 2.0 पोर्टल के माध्यम से दर्ज किया जाता है।
- सत्यापन: इलाज की प्रक्रिया शुरू करने से पहले पुलिस सत्यापन और अन्य मानक औपचारिकताओं को पूरा करना अनिवार्य है।
इन 8 अस्पतालों में मिल सकती है सुविधा
किशनगंज जिले के आठ प्रमुख अस्पतालों को इस कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए चुना गया है, ताकि दुर्घटना के तुरंत बाद मरीज को सही उपचार मिल सके:
- MGM मेडिकल कॉलेज
- क्रिब्स अस्पताल
- नियाज़ मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल (ठाकुरगंज)
- रेडिएंट मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल
- Z.A. नर्सिंग होम
- डॉ. निरंजन चाइल्ड केयर
- सेकंड साइट केयर
- BR नेत्रालय
'गोल्डन आवर' में इलाज है जीवन बचाने के लिए जरूरी
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की प्राथमिकता जीवन बचाना है। उन्होंने कहा कि धन की कमी के कारण किसी भी व्यक्ति को समय पर इलाज से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
"दुर्घटना के बाद का 'गोल्डन आवर' (पहला महत्वपूर्ण घंटा) जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। नागरिकों से अपील है कि वे पैसों की चिंता छोड़कर तुरंत घायल को अस्पताल पहुंचाएं।"
— डॉ. राज कुमार चौधरी, सिविल सर्जन
सिविल सर्जन ने लोगों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत 112 नंबर पर कॉल करने की सलाह भी दी है। वहीं, DPM डॉ. मुनाजिम ने दोहराया कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी पीड़ित इलाज से वंचित न रहे।