किशनगंज: कादोगांव में पटरी के नीचे मिट्टी खिसकी, मंडरा रहा बड़ा खतरा

Ghazala Saheb5 October 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज: कादोगांव में पटरी के नीचे मिट्टी खिसकी, मंडरा रहा बड़ा खतरा

बिहार के किशनगंज जिले से रेल सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। ठाकुरगंज प्रखंड के सुखानी थाना क्षेत्र के अंतर्गत तातपौआ पंचायत में कादोगांव रेलवे हॉल्ट के पास अररिया-गलगलिया रेलखंड पर पटरी के नीचे की मिट्टी खिसकने से बड़ा हादसा होने की आशंका पैदा हो गई है। मिट्टी के कटाव के कारण रेल पटरी के नीचे एक खाली जगह बन गई है, जो किसी सुरंग की तरह दिखाई दे रही है।

पटरी के नीचे बनी 'सुरंग', ग्रामीणों में दहशत

रेलवे ट्रैक के नीचे मिट्टी कटने और खाली स्थान बनने की खबर से आसपास के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिट्टी के लगातार कटाव के कारण पटरी की मजबूती खतरे में है। यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन पर गंभीर असर पड़ सकता है और कभी भी कोई बड़ी रेल दुर्घटना घट सकती है।

अस्थायी इंतजामों से नहीं थमेगा खतरा

सूचना मिलने के बाद रेलवे की ओर से बचाव के तौर पर मिट्टी से भरी बोरियों को प्रभावित स्थल के किनारे रखा गया है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने इन उपायों को अपर्याप्त बताया है। लोगों का तर्क है कि जिस तरह से पटरी के नीचे मिट्टी खिसकी है, उसे देखते हुए केवल बोरियां डालना काफी नहीं है। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित हिस्से का तकनीकी निरीक्षण कर पटरी के नीचे एक स्थायी और मजबूत आधार तैयार किया जाए।

रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस मामले में रेलवे अधिकारी एसडीआरएम डी. वर्मा ने बताया कि उन्हें घटना की पूरी जानकारी मिल गई है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों और रेलवे अधिकारियों की एक टीम को तुरंत मौके पर भेजा जा रहा है। स्थल की स्थिति की गहन जांच करने के बाद, आवश्यकतानुसार तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को पूरी तरह टाला जा सके।

गौरतलब है कि अररिया से गलगलिया तक का यह नया रेलखंड लगभग 110 से 111 किलोमीटर लंबा है। यह पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार डिवीजन के अंतर्गत आता है और बिहार के सीमांचल क्षेत्र को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। कादोगांव हॉल्ट के पास हुई इस घटना ने रेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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