सड़क हादसे में घायलों को राहत: 1.50 लाख तक का होगा कैशलेस इलाज

किशनगंज में सड़क दुर्घटना में घायलों को अब 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। जानें किन अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है।

Ghazala Saheb28 October 20262 min read0 viewsBihar
सड़क हादसे में घायलों को राहत: 1.50 लाख तक का होगा कैशलेस इलाज

किशनगंज में सड़क दुर्घटना का शिकार होने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। अब सड़क हादसों में घायल होने के बाद इलाज के खर्च को लेकर घबराने या समय गंवाने की जरूरत नहीं होगी। प्रशासन ने घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सड़क हादसे में कैशलेस इलाज की व्यवस्था शुरू की है।

कैसे मिलेगा इस योजना का लाभ?

इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण इलाज में होने वाली देरी को रोकना और कीमती जान बचाना है। योजना के तहत, पात्र घायलों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सात दिनों तक अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का उपचार मिल सकेगा।

आयुष्मान भारत कार्यक्रम के जिला समन्वयक पंकज कुमार के अनुसार, इस व्यवस्था के अंतर्गत स्वीकृत उपचार का भुगतान सीधे अस्पताल को किया जाता है। इससे घायल व्यक्ति और उसके परिजनों को तत्काल पैसों का इंतजाम करने की मानसिक और आर्थिक परेशानी से मुक्ति मिलेगी।

इन 8 अस्पतालों में मिलेगी सुविधा

जिले में इस योजना का लाभ उठाने के लिए आठ निजी अस्पतालों को चयनित किया गया है। दुर्घटना की स्थिति में इन अस्पतालों में जाकर उपचार की पात्रता और उपलब्ध सुविधाओं की पुष्टि की जा सकती है। चयनित अस्पतालों की सूची इस प्रकार है:

  • एमजीएम मेडिकल कॉलेज
  • क्रिब्स हॉस्पिटल
  • नियाज मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ठाकुरगंज
  • रेडियंट मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
  • जेड ए नर्सिंग होम
  • डॉ. निरंजन चाइल्ड केयर
  • सेकंड साइट केयर
  • बीआर नेत्रालय

'गोल्डन ऑवर' में इलाज है जीवन रक्षक

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा, जिसे 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है, घायल की जान बचाने में सबसे निर्णायक होता है। इस दौरान यदि रक्तस्राव को रोक दिया जाए और गंभीर चोटों का तुरंत उपचार शुरू हो जाए, तो जीवन बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

आपातकालीन स्थिति में मदद के लिए तुरंत 112 नंबर पर सूचना दी जा सकती है। जिलाधिकारी नवीन कुमार ने अपील की है कि दुर्घटना होने पर घायलों को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाएं। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि इलाज में देरी का कारण आर्थिक तंगी नहीं होनी चाहिए।

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