किशनगंज में दिखेगा अमेरिका का वैभव! स्वामीनारायण मंदिर जैसा भव्य पंडाल

किशनगंज के ऐतिहासिक रुईधासा मैदान के समीप इस बार दुर्गोत्सव की भव्यता देखते ही बन रही है। टाउन क्लब दुर्गा पूजा समिति की ओर से तैयार किया जा रहा गगनचुंबी पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस साल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पंडाल को अमेरिका के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसकी भव्य संरचना दूर से ही लोगों का ध्यान खींच रही है।
अमेरिका के मंदिर की भव्यता का अहसास
पंडाल की बारीक कारीगरी और गगनचुंबी संरचना श्रद्धालुओं के बीच भारी उत्साह पैदा कर रही है। नवरात्र के पावन अवसर पर किशनगंज सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहाँ पहुँचने की उम्मीद है। पंडाल की आकर्षक सजावट और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था ने इसकी रौनक को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे यह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
1982 से शुरू हुई आस्था की यह परंपरा
रुईधासा की दुर्गा पूजा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और सामूहिक प्रयास की एक मिसाल है। स्थानीय निवासी एवं पूजा समिति के सदस्य राजेश दुबे के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत काफी संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रही है।
वर्ष 1982 में बैंक सेवा से सेवानिवृत्त हुए पांच साथियों—संदीप घोष राय, स्वर्गीय बिमल दास, सुनील कुंडू, प्रदीप मजूमदार और गौतम दास ने यहाँ पहली बार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की थी।
पांच लोगों की वह छोटी सी पहल आज चार दशकों से अधिक पुरानी एक समृद्ध परंपरा में बदल चुकी है। समय के साथ पूजा का स्वरूप भव्य होता गया, लेकिन इसकी मूल भावना और आस्था आज भी वैसी ही कायम है।
बंगाली परंपरा और मंत्रोच्चार का संगम
टाउन क्लब की इस पूजा में बंगाली परंपरा का विशेष महत्व है। मुख्य पुजारी पंडित संजय भट्टाचार्य, जो अपने पिता की इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, बताते हैं कि यहाँ पूजा की विधि अत्यंत पारंपरिक है।
- आरती का समय: प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 6 बजे।
- विशेष आकर्षण: विशेष मंत्रोच्चार, पुष्पांजलि और ढाक की थाप पर होने वाली आरती।
- महाप्रसाद: अष्टमी और नवमी के अवसर पर विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा, जिसमें खिचड़ी, हलुआ और फल का महाप्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाएगा।
रुईधासा मैदान के पास होने के कारण यहाँ पूजा के साथ-साथ मेले का भी आनंद लिया जा सकता है। इस बार का यह भव्य पंडाल किशनगंज के दुर्गोत्सव को एक नई और यादगार पहचान देने जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेगा।