किशनगंज: सदर अस्पताल में मुफ्त सिजेरियन, गरीबों के 40 हजार बचे

किशनगंज के गरीब परिवारों के लिए सदर अस्पताल अब एक बड़ी राहत का केंद्र बन गया है। आर्थिक तंगी के कारण पहले जटिल प्रसव (सिजेरियन ऑपरेशन) कराना एक बड़ा सपना और भारी बोझ होता था, लेकिन अब सरकारी अस्पताल में मिल रही निःशुल्क सिजेरियन सुविधा ने मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों की चिंता दूर कर दी है।
निजी अस्पतालों के भारी खर्च से मिली मुक्ति
अक्सर देखा जाता है कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन ऑपरेशन कराने के लिए परिवारों को 40 हजार रुपये से भी अधिक का खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए यह राशि जुटाना लगभग असंभव हो जाता है। लेकिन सदर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में यह सुविधा मुफ्त मिल रही है, जिससे सीधे तौर पर हजारों रुपयों की बचत हो रही है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने संभाले जटिल मामले
सदर अस्पताल में केवल सामान्य प्रसव ही नहीं, बल्कि बेहद जटिल मामलों को भी सफलतापूर्वक संभाला जा रहा है। हाल ही में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शबनम यास्मीन ने दो अत्यंत चुनौतीपूर्ण सिजेरियन ऑपरेशन किए:
- पहला मामला: एक गर्भवती महिला की गर्भावस्था निर्धारित समय से काफी आगे बढ़ चुकी थी, जिसमें जोखिम अधिक था।
- दूसरा मामला: एक महिला की पहली गर्भावस्था थी और उसके गर्भाशय में फाइब्रॉइड (गांठ) की समस्या भी मौजूद थी।
इन दोनों ही मामलों में विशेष चिकित्सकीय सावधानी बरतते हुए सफल ऑपरेशन किए गए, जिससे मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
अस्पताल के आंकड़े और उपलब्धियां
अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार देखा जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- एक ही दिन में 20 सामान्य प्रसव कराए गए।
- 1 अक्टूबर से अब तक कुल 10 सिजेरियन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।
अधिकारियों का संकल्प और लाभार्थियों की खुशी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण और मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं, जिलाधिकारी नवीन कुमार ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए हैं।
"निजी अस्पताल में 40 हजार रुपये खर्च करना हमारे लिए बहुत मुश्किल था। सदर अस्पताल में मुफ्त ऑपरेशन होने से हमें बहुत बड़ी राहत मिली है। हम सरकार और डॉक्टरों के बहुत आभारी हैं।"
— रमेश (राधा के पति)
इस सुविधा के कारण जिले के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अब इलाज के लिए शहर के महंगे निजी अस्पतालों की ओर नहीं भागना पड़ रहा है।