किशनगंज सदर अस्पताल: अब मरीजों का भरोसा जीतना होगी प्राथमिकता

किशनगंज सदर अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों का भरोसा जीतने के लिए विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

Ghazala Saheb24 October 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज सदर अस्पताल: अब मरीजों का भरोसा जीतना होगी प्राथमिकता

किशनगंज सदर अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी और मरीज-केंद्रित बनाने के लिए शनिवार को एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अस्पताल प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बेहतर इलाज का मतलब केवल दवाएं देना नहीं, बल्कि मरीजों को सम्मान और सहयोग देना भी है। इसी उद्देश्य के साथ चिकित्सकों और पारामेडिकल कर्मियों के साथ विशेष बैठकें आयोजित की गईं।

इलाज के साथ सम्मान भी है जरूरी

बैठकों में इस बात पर जोर दिया गया कि अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार लाना और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाना अनिवार्य है। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी और अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. मंजर आलम की उपस्थिति में हुई चर्चा में उपचार की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया गया।

चिकित्सकों के साथ हुई बैठक में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर विचार किया गया:

  • गुणवत्तापूर्ण उपचार: मरीजों को मिलने वाले इलाज के स्तर को ऊंचा उठाना।
  • समय पर परामर्श: अस्पताल आने वाले मरीजों को बिना किसी देरी के चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराना।
  • सुचारु संचालन: अस्पताल की विभिन्न सेवाओं को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से चलाना।

ग्रामीण मरीजों की जरूरतों पर विशेष ध्यान

अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया कि सदर अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल मरीजों के लिए राहत का काम करेगा। अधिकारियों ने कहा कि अस्पताल को पूरी तरह से मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

पारामेडिकल कर्मियों की भूमिका और समन्वय

चिकित्सकों के साथ-साथ पारामेडिकल कर्मियों की भी बैठक की गई, क्योंकि जांच और मरीजों की देखरेख में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में कहा गया कि बेहतर समन्वय के माध्यम से ही उपचार प्रक्रिया को सुचारु बनाया जा सकता है।

"स्वास्थ्य व्यवस्था में मरीजों का भरोसा कायम रखने के लिए गुणवत्तापूर्ण उपचार के साथ-साथ संवेदनशील व्यवहार और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।"
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