किशनगंज में बड़ा हादसा: मिट्टी का ढेर गिरने से तीन मासूमों की मौत

बिहार के किशनगंज में बड़ा हादसा! मिट्टी खोदते समय अचानक ढेर गिरा और तीन बच्चियों की दबकर मौत हो गई। जानें क्या है पूरा मामला।

Ghazala Saheb4 November 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज में बड़ा हादसा: मिट्टी का ढेर गिरने से तीन मासूमों की मौत

बिहार के किशनगंज जिले से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां किशनगंज में मिट्टी धंसने से तीन लड़कियों की मौत हो गई। दीघलबंक ब्लॉक के सुल्तानगंज इलाके में मिट्टी का एक बड़ा ढेर अचानक गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीन मासूम बच्चियों की जान चली गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

घर के काम के दौरान हुआ हादसा

यह दुखद घटना बुधवार को सुल्तानगंज (वार्ड नंबर 10) में हरुआडांगा बाजार के पास हुई। जानकारी के अनुसार, बच्चियां अपने घर के पास स्थित मिट्टी के ढेर से मिट्टी निकाल रही थीं। वे संभवतः घर के नवीनीकरण (renovation) के काम के लिए मिट्टी खोद रही थीं, तभी अचानक मिट्टी का भारी ढेर उन पर आ गिरा और वे मलबे के नीचे दब गईं।

हादसे का शिकार हुई बच्चियों की पहचान इस प्रकार है:

  • नगमा परवीन (10 वर्ष): जमदेश आलम की पुत्री।
  • निशा परवीन (9 वर्ष): जमदेश आलम की पुत्री।
  • रूबी खातून/परवीन (8 वर्ष): फरियाद आलम की पुत्री।

रेस्क्यू में नाकाम रही कोशिश

हादसे के वक्त वहां मौजूद एक बच्चे ने शोर मचाकर गांव वालों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण फावड़े और कुदाल लेकर तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चियों को बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने करीब आधे घंटे तक कड़ी मशक्कत की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मिट्टी के नीचे दबने के कारण बच्चियों की दम घुटने से मौत हो गई थी।

प्रशासन की कार्रवाई और गांव में सन्नाटा

घटना की जानकारी मिलते ही दीघलबंक थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि, इस दौरान परिजनों का भारी रो-रोकर बुरा हाल था और उन्होंने शवों का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया।

"परिवार के विरोध के कारण बच्चियों का पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका।" — अनिकेत कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी (SDM)

इस त्रासदी ने पूरे सुल्तानगंज गांव को झकझोर कर रख दिया है। पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने शोक व्यक्त किया है। दुख की इस घड़ी में गांव का माहौल इतना गमगीन है कि कई घरों में शोक के कारण खाना तक नहीं बनाया गया है।

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