बच्चों के शोषण पर सख्त कानून: किशनगंज में सुरक्षित बचपन अभियान

किशनगंज में DLSA द्वारा सुरक्षित बचपन अभियान चलाया जा रहा है, जहाँ स्कूलों में बच्चों को बाल विवाह, पॉक्सो एक्ट और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

Ghazala Saheb28 October 20262 min read0 viewsBihar
बच्चों के शोषण पर सख्त कानून: किशनगंज में सुरक्षित बचपन अभियान

किशनगंज में बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और बाल शोषण जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से एक विशेष पहल शुरू की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), किशनगंज की ओर से 'सुरक्षित बचपन अभियान' चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से जिले के विभिन्न स्कूलों में बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सचेत किया जा रहा है।

स्कूलों में जागरूकता शिविरों का आयोजन

यह अभियान आगामी 31 अक्टूबर 2026 तक निरंतर जारी रहेगा। इसके तहत जिले के चिन्हित विद्यालयों में प्रतिदिन विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को किशनगंज के नेशनल उच्च विद्यालय, सेंट जेवियर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल और बाल मंदिर विद्यालय में विशेष जागरूकता शिविर लगाए गए।

इन कार्यक्रमों में न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, शिक्षकों, संबंधित विभागों के विशेषज्ञों और पारा विधिक स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

इन महत्वपूर्ण विषयों पर मिल रही जानकारी

शिविरों के दौरान छात्र-छात्राओं को कानून की बारीकियों और सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया गया। मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • बाल संरक्षण कानून: बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कानूनी प्रावधान।
  • पॉक्सो (POCSO) एक्ट: यौन अपराधों से बच्चों को बचाने के लिए बनाया गया कड़ा कानून।
  • बाल विवाह और बाल श्रम: इन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कानूनी जानकारी।
  • साइबर सुरक्षा: डिजिटल युग में बच्चों को साइबर अपराधों से बचाने के तरीके।

बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा पर जोर

बाल मंदिर विद्यालय में आयोजित शिविर के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों और विधिक सेवा प्राधिकार के प्रतिनिधियों ने बच्चों को बहुत ही सरल भाषा में उनके अधिकारों के बारे में समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक बच्चे को एक सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक गरिमा और शोषण एवं हिंसा से मुक्त जीवन जीने का मौलिक अधिकार है।

"बच्चों के साथ होने वाला किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार उनके शारीरिक और मानसिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए परिवार, विद्यालय और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चों की सुरक्षा के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए।"

मदद के लिए हेल्पलाइन और कानूनी सहायता

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे बाल विवाह, बाल श्रम, यौन उत्पीड़न या साइबर अपराध जैसी किसी भी समस्या का सामना करते हैं, तो उन्हें चुप नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें तुरंत उचित सहायता लेनी चाहिए।

बच्चों को यह भी समझाया गया कि जरूरत पड़ने पर वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित मदद पाने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी साझा की गई। इस अभियान में डीएलएसए सचिव ओम शंकर सहित कई न्यायिक पदाधिकारी और शिक्षक शामिल होकर बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए काम कर रहे हैं।

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