टीबी से जंग: किशनगंज में 5 लाख से ज्यादा लोगों की जांच, पोषण पर भी विशेष जोर

किशनगंज जिले में टीबी (क्षय रोग) को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी मुहिम छेड़ी है। इस लड़ाई में केवल नियमित दवा ही काफी नहीं है, बल्कि मरीजों को समय पर जांच, सही उपचार और सबसे महत्वपूर्ण—पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना भी अनिवार्य है। जिलाधिकारी नवीन कुमार के नेतृत्व में जिले में इस दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।
स्क्रीनिंग और एक्स-रे के बड़े आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2 जुलाई से 5 अक्टूबर 2026 के बीच जिले में कुल 5,34,282 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इस अभियान के तहत 45,560 एक्स-रे किए गए, जिससे बीमारी का जल्द पता लगाने में मदद मिली। इसके साथ ही, 3,106 पात्र लोगों को टीबी निवारक उपचार भी उपलब्ध कराया गया।
अभियान के दौरान 1,88,299 लोगों को जोखिम की दृष्टि से संवेदनशील समूह में चिह्नित किया गया, जिनमें से 39,392 लोगों का एक्स-रे कराया गया है।
ब्लॉकवार प्रदर्शन: कहीं सफलता, कहीं चुनौती
जांच के लक्ष्यों को लेकर अलग-अलग ब्लॉकों में प्रदर्शन काफी भिन्न रहा। जहाँ कुछ ब्लॉकों ने शानदार उपलब्धि हासिल की, वहीं कुछ जगहों पर लक्ष्य से पीछे रह गए:
- टेढ़ागाछ: 94 प्रतिशत उपलब्धि
- पोठिया: 86 प्रतिशत उपलब्धि
- कोचाधामन: 73 प्रतिशत उपलब्धि
इसके विपरीत, किशनगंज ब्लॉक में केवल 29 प्रतिशत, दिघलबैंक में 44 प्रतिशत और बहादुरगंज में 46 प्रतिशत ही जांच हो सकी।
निक्षय पोषण योजना: दवा के साथ पोषण का सहारा
टीबी के मरीजों के शरीर को रिकवरी के लिए ताकत की जरूरत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए निक्षय पोषण योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
अब तक जिले के 2,241 लाभार्थियों में से 2,170 के भुगतान खाते तैयार कर लिए गए हैं। कुल मिलाकर, 1,466 लाभार्थियों को 53 लाख 94 हजार 500 रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा, 'डिफरेंशिएटिव टीबी केयर' के तहत 517 मरीजों को आर्थिक मदद के साथ फूड पैकेट भी दिए जा रहे हैं।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी और जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने लोगों से अपील की है कि टीबी के लक्षणों के प्रति सतर्क रहें। यदि किसी को निम्नलिखित लक्षण महसूस हों, तो तुरंत जांच कराएं:
- लगातार खांसी आना
- बुखार रहना
- रात में पसीना आना
- वजन में अचानक कमी आना
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी की पुष्टि होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित उपचार पूरा करना बेहद जरूरी है।