किशनगंज: निविदा में धांधली! कार्यपालक अभियंता के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की सिफारिश

किशनगंज में निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितता का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन (एलएइओ), कार्य प्रमंडल किशनगंज के कार्यपालक अभियंता (EE) इंजीनियर मो. नसीम अख्तर के विरुद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। पूर्णिया के अधीक्षण अभियंता इंजीनियर बिनोद कुमार रंजन ने इस गंभीर मामले में योजना एवं विकास विभाग, बिहार के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई करने और संबंधित निविदा को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
क्या है निविदा में गड़बड़ी का पूरा मामला?
अधीक्षण अभियंता द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, अति अल्पकालीन निविदा आमंत्रण सूचना संख्या 04/2026-27 के तहत परिमाण विपत्र (BoQ) की बिक्री के लिए 18 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक का समय निर्धारित किया गया था। विभागीय नियमों के तहत, निविदा दस्तावेज की बिक्री सुचारू रूप से हो सके, इसके लिए अधीक्षण अभियंता कार्यालय में भी प्रत्येक ग्रुप की कम से कम दो प्रतियां उपलब्ध कराई जानी अनिवार्य थीं।
आरोप है कि कार्यपालक अभियंता की ओर से जानबूझकर अधीक्षण अभियंता कार्यालय में परिमाण विपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। इस बड़ी चूक के कारण कार्यालय से निविदा दस्तावेजों की बिक्री नहीं हो सकी। इसे विभागीय निर्देशों की सीधी अनदेखी और निविदा प्रक्रिया में एक गंभीर अनियमितता माना गया है।
बार-बार दिए गए निर्देशों को किया गया नजरअंदाज
जांच में यह बात भी सामने आई है कि इस संबंध में कार्यपालक अभियंताओं को पहले भी कई बार लिखित निर्देश दिए जा चुके थे। अधीक्षण अभियंता कार्यालय ने पूर्व में निम्नलिखित तिथियों पर पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए थे:
- 20 मार्च 2025
- 9 मई 2025
- 5 जून 2026
इन पत्रों में स्पष्ट कहा गया था कि निविदा बिक्री की तिथि से कम से कम तीन दिन पहले प्रत्येक ग्रुप के कम से कम दो परिमाण विपत्र उपलब्ध करा दिए जाएं। साथ ही, अधीक्षण अभियंता कार्यालय से 'Sale/No Sale' पत्र प्राप्त करने के बाद ही निविदा की आगे की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश भी दिया गया था।
मामले में बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता की कंडिका 159 (क) (i) का भी उल्लंघन पाया गया है। इस नियम के अनुसार, 15 लाख रुपये या उससे कम राशि के कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर निविदा आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर अधीक्षण अभियंता की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
स्पष्टीकरण मांगने पर भी नहीं मिला जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षण अभियंता ने 22 सितंबर को ही निविदा को रद्द कर दिया था और कार्यपालक अभियंता से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था। जब निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिला, तो 25 सितंबर को एक और स्मरण पत्र (Reminder) जारी कर दो दिनों का समय दिया गया।
अधीक्षण अभियंता के अनुसार, बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद कार्यपालक अभियंता की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। इसी कारण अब उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।