कोसी-मेची परियोजना: धूल प्रदूषण से ग्रामीणों का स्वास्थ्य खतरे में

सुपौल जिले में कोसी-मेची परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य से बढ़ते कोसी-मेची परियोजना धूल प्रदूषण ने स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। छातापुर प्रखंड की ठूठी पंचायत सहित आसपास के इलाकों में निर्माण स्थल से उड़ने वाली धूल और मिट्टी के गुबार ने न केवल पर्यावरण को प्रदूषित किया है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
धूल के गुबार से सांस लेना हुआ मुश्किल
ग्रामीणों का आरोप है कि बलुआ साइड से आगे नहर निर्माण स्थल के पास काम के दौरान भारी मात्रा में धूल उड़ रही है। निर्माण स्थल पर नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण धूल का गुबार सीधे लोगों के घरों और खेतों तक पहुंच रहा है।
इस प्रदूषण के कारण स्थानीय लोगों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- आंखों में जलन और एलर्जी: लगातार धूल के संपर्क में रहने से लोगों की आंखों में जलन और एलर्जी की समस्या बढ़ रही है।
- सांस संबंधी बीमारियां: धूल के गुबार के कारण श्वसन संबंधी परेशानियों का खतरा पैदा हो गया है।
- कमजोर वर्ग पर असर: विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हस्तक्षेप की मांग
इस गंभीर समस्या को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. आलोक आनंद ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पटना के अध्यक्ष को एक आवेदन भेजा है। उन्होंने मामले की तत्काल जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
"हम कोसी-मेची परियोजना जैसी महत्वपूर्ण विकास योजना के विरोधी नहीं हैं। हमारा उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए।" - डॉ. आलोक आनंद
जांच और सख्त कार्रवाई की अपील
डॉ. आलोक आनंद ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- विभागीय टीम भेजकर निर्माण स्थल का निरीक्षण किया जाए।
- निर्माण कार्य के दौरान नियमित रूप से पानी का छिड़काव सुनिश्चित कराया जाए।
- यदि पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।