'EMI मुख्यमंत्री' निकले रेवंत रेड्डी? KTR ने सिंगरेनी घोटाले की न्यायिक जांच की दी चुनौती

Ghazala Saheb16 October 20262 min read0 viewsBihar
'EMI मुख्यमंत्री' निकले रेवंत रेड्डी? KTR ने सिंगरेनी घोटाले की न्यायिक जांच की दी चुनौती

तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटीटीआर (KTR) ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "EMI मुख्यमंत्री" करार दिया है। केटीटीआर ने सिंगरेनी कोलियरी घोटाले, कोयला आयात और बिजली खरीद में बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की चुनौती दी है।

कोयले के आयात में भारी गड़बड़ी का आरोप

केटीटीआर ने आरोप लगाया कि तेलंगाना सरकार स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध कोयले के बजाय महंगे विदेशी कोयले को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कोयला सस्ता है, लेकिन सरकार जानबूझकर विदेशी आयात की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा:

"सिंगरेनी में कोयला लगभग ₹3,800 प्रति टन उपलब्ध है, जबकि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आयातित कोयले की कीमत ₹10,000 से ₹12,000 प्रति टन तक पहुंच सकती है। यह निर्णय कमीशनखोरी और गलत इरादों से प्रेरित लगता है।"

बीआरएस नेता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच केवल कागजी कार्रवाई या मीडिया के सामने बहस तक सीमित न रहकर, एक हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में होनी चाहिए।

₹10,000 करोड़ का घोटाला और पारिवारिक कनेक्शन

केटीटीआर के आरोप और भी गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि सिंगरेनी में मुख्यमंत्री के साले से जुड़े एक ₹10,000 करोड़ के घोटाले की जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने सिंगरेनी में सौर ऊर्जा घोटाले (Solar Power Scam) को भी उजागर करने की चेतावनी दी है।

बिजली संकट और 'EMI मुख्यमंत्री' का टैग

केटीटीआर ने वर्तमान सरकार की बिजली नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि तेलंगाना, जो कभी 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए जाना जाता था, अब बिजली की भारी कमी से जूझ रहा है। उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु उठाए:

  • महंगी बिजली खरीद: बीआरएस सरकार ने छत्तीसगढ़ से ₹3.90 प्रति यूनिट पर बिजली खरीदी थी, जिसे कांग्रेस ने घोटाला बताया था। अब कांग्रेस सरकार ₹15 प्रति यूनिट पर बिजली खरीदने पर विचार कर रही है।
  • वित्तीय दबाव: केटीटीआर ने रेवंत रेड्डी को "EMI मुख्यमंत्री" कहते हुए कहा कि वे राजनीतिक और वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के दबाव में हैं, जिसके कारण कोयला और बिजली के सौदों में कमीशनखोरी की आशंका है।
  • सिंगरेनी पर संकट: सिंगरेनी कोलियरी पर ₹60,000 करोड़ का बकाया है, जिससे कंपनी की स्थिति खराब हो रही है और उत्पादन में गिरावट आ रही है।

केटीटीआर ने चेतावनी दी कि सरकार की इन नीतियों के कारण राज्य में सूखे का खतरा बढ़ सकता है और किसानों व उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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