लद्दाख के 8 जिलों में अब बनेंगे हिल काउंसिल, LG ने किया बड़ा ऐलान

Ghazala Saheb20 October 20262 min read0 viewsBihar
लद्दाख के 8 जिलों में अब बनेंगे हिल काउंसिल, LG ने किया बड़ा ऐलान

लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे और स्थानीय शासन को नई मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख हिल काउंसिल (LAHDC) संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब लद्दाख के सभी आठ जिलों में हिल काउंसिल का गठन किया जा सकेगा, जिसमें नवनिर्मित सांगू (Sankoo) जिला भी शामिल है।

रिकॉर्ड समय में लागू हुआ ऐतिहासिक नियम

इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया बेहद तेज रही है। 14 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन संशोधनों को मंजूरी दी थी, जिसके बाद 16 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे प्रख्यापित किया। इसके तुरंत बाद, 19 अक्टूबर को उपराज्यपाल ने इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया। महज छह दिनों के भीतर इस ऐतिहासिक नियम को लागू करना प्रशासन की तत्परता को दर्शाता है।

क्या बदलेगा? जानें नए नियमों की मुख्य बातें

नए संशोधनों के माध्यम से परिषदों की संरचना को अधिक व्यावहारिक और समावेशी बनाने का प्रयास किया गया है। इसके तहत कुछ प्रमुख बदलाव किए गए हैं:

  • सीटों का युक्तिकरण: पहले प्रत्येक परिषद में 26 सीटें होती थीं, लेकिन अब इसे बदलकर न्यूनतम 7 और अधिकतम 24 सीटों के बीच कर दिया गया है।
  • समावेशी शासन: स्थानीय शासन में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, 'महिलाओं' और 'प्रतिनिधित्व न पाने वाले समुदायों' से चार सदस्यों के नामांकन का प्रावधान किया गया है।

जमीनी लोकतंत्र को मिलेगी नई ताकत

लद्दाख के प्रशासनिक विस्तार को देखते हुए यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है। लद्दाख अब दो जिलों से बढ़कर आठ जिलों (लेह, कारगिल, शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ांस्कर, द्रास और सांगू) में विभाजित हो चुका है। अब तक केवल लेह और कारगिल में ही निर्वाचित प्रतिनिधित्व था, लेकिन इस नए संशोधन के बाद सभी नए जिलों को वही शक्तियां और अधिकार प्राप्त होंगे जो लेह और कारगिल की परिषदों के पास हैं।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कदम जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करेगा, स्थानीय प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा और समाज के हर वर्ग को शासन में शामिल करने के लिए समावेशिता को बढ़ावा देगा।

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