लद्दाख में अब नहीं होगी पानी की कमी, खेती में आएगा बंपर उछाल: LG सक्सेना
लद्दाख में पानी की कमी दूर करने के लिए LG वीके सक्सेना ने बड़े ऐलान किए हैं। तालाबों और चेक डैम के जरिए खेती को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी है।

लद्दाख में पानी की समस्या अब बीते दिनों की बात होने वाली है। केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल (LG) वीके सक्सेना ने क्षेत्र में चल रहे व्यापक विकास कार्यों और जल प्रबंधन की रणनीतियों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे ग्लेशियर के पानी का सही उपयोग करके लद्दाख की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया जाएगा और यहाँ के निवासियों को पानी की किल्लत से राहत मिलेगी।
ग्लेशियर के पानी का होगा भरपूर उपयोग
लद्दाख में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद, कई गांव और शहर पानी की भारी कमी का सामना कर रहे थे। LG सक्सेना ने बताया कि हर साल लगभग 300 ट्रिलियन लीटर ग्लेशियर का पानी नदियों में बहता है, लेकिन मार्च तक इसका केवल 1.5% ही उपयोग हो पा रहा था। इस समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन ने अब तक 60 गांवों में तालाबों का निर्माण किया है, जिनमें से 40 का उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री ने किया है। इसके अलावा, सालों से सूखी पड़ी 'इगु नहर' (Igu Canal) में अब 200 मिलियन लीटर ग्लेशियर का पानी पहुंचाया जा रहा है, जिससे अब वहां चौबीसों घंटे पानी उपलब्ध रहता है।
त्सो कर झील का पुनरुद्धार और पशुपालकों को राहत
क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए 'त्सो कर झील' (Tso Kar Lake) को पुनर्जीवित करना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पहले यह झील सूख रही थी, जिससे स्थानीय पश्मीना बकरी पालने वाले चरवाहों की आय पर बुरा असर पड़ रहा था। चरवाहों को पानी और चारे के लिए 50 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। अब प्रशासन 18,000 फीट की ऊंचाई से पानी को 15,000 फीट तक लाकर इस झील को फिर से हरा-भरा बना रहा है। इस प्रयास के सफल होने से जानवरों को पानी मिल रहा है और क्षेत्र में हरियाली लौट रही है।
100 नए गांवों में बनेंगे तालाब
LG सक्सेना ने घोषणा की कि लगभग 100 और गांवों की पहचान की गई है जहाँ पानी की गंभीर कमी है। स्थानीय नंबरदारों (गांव के मुखिया) के साथ चर्चा के बाद, फरवरी के अंत तक इन 100 गांवों में नए तालाब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ये तालाब ग्लेशियर के पानी से भरे जाएंगे। इससे किसानों को फरवरी और मार्च के महीने में, जब बुवाई के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब पानी की कोई समस्या नहीं होगी।
सिंधु नदी पर इको-फ्रेंडली चेक डैम का निर्माण
सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए सिंधु नदी के किनारे स्थानीय पत्थरों से बने 'रॉक चेक डैम' का निर्माण किया जा रहा है। ये डैम न केवल किफायती हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। हाल ही में पांच चेक डैम बनाए गए हैं, जो प्रत्येक 25 से 30 मिलियन लीटर पानी जमा कर रहे हैं। पहले यह पानी बिना किसी उपयोग के बह जाता था, लेकिन अब चेक डैम के कारण पानी का स्तर बढ़ गया है, जिससे ग्रामीण आसानी से अपने खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा पा रहे हैं।