IRCTC केस: लालू प्रसाद यादव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम, ED से मांगा जवाब
IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने ED से जवाब मांगा है। जानें क्या है पूरा मामला।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईआरटीसी (IRCTC) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व बिहार मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने लालू प्रसाद यादव द्वारा राउज एवेन्यू कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर यह नोटिस जारी किया है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
लालू प्रसाद यादव ने 10 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए थे। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को तय की है। साथ ही, हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष स्थगन (adjournment) लेने की अनुमति भी प्रदान की है।
किन आरोपियों पर चल रही है जांच?
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 10 सितंबर को नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इनमें शामिल हैं:
- लालू प्रसाद यादव
- राबड़ी देवी
- तेजस्वी यादव
- पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता
- सरला गुप्ता
- लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी (LARA Projects LLP)
- सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड
- विजय कोचर
- विनय कोचर
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत आरोपियों के खिलाफ मजबूत संदेह पैदा करते हैं, जिसके कारण मुकदमा चलाना आवश्यक है। अदालत ने पटना में भूमि लेनदेन के संबंध में पद के दुरुपयोग और अपराध की कमाई के उपयोग के आरोपों का भी उल्लेख किया था।
सुजाता होटल को मिली राहत
इसी मामले में एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। हालांकि, यह राहत केवल कंपनी तक सीमित है और अन्य आरोपियों पर लागू नहीं होती है। कंपनी का तर्क है कि उसने न तो संबंधित भूमि का स्वामित्व रखा और न ही उसे बेचा।
CBI और ED के आरोप क्या हैं?
यह पूरा मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान IRCTC होटल टेंडर देने में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के आधार पर ED का आरोप है कि:
- टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की गई थी।
- टेंडर से प्राप्त कथित अवैध धन का उपयोग पटना में भूमि लेनदेन के लिए किया गया था।
फिलहाल, इन सभी आरोपों की पुष्टि ट्रायल के दौरान की जानी अभी बाकी है।