लैंड फॉर जॉब केस: लालू-तेजस्वी समेत अन्य आरोपियों पर फिर होगी बहस, कोर्ट में नई सुनवाई तय

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 'लैंड फॉर जॉब' PMLA मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और तेज प्रताप यादव समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने (framing of charges) की प्रक्रिया अब नए सिरे से शुरू होगी। मामले की सुनवाई अब विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार द्वारा की जाएगी और इस पर बहस 14 और 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
क्यों दोबारा शुरू हो रही है सुनवाई?
इस मामले में नई सुनवाई की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि पूर्व विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने, जिन्होंने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, उनका तबादला दिल्ली उच्च न्यायालय में कर दिया गया है। न्यायाधीश के स्थानांतरण के बाद अब नए न्यायाधीश के समक्ष मामले की बहस नए सिरे से होगी।
क्या है 'लैंड फॉर जॉब' घोटाला?
यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला सीबीआई की उस जांच से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, उस दौरान रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर नियुक्तियों के बदले लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं को जमीन के टुकड़े ट्रांसफर किए गए थे। हालांकि, आरोपियों ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।
ED के गंभीर आरोप और जांच के मुख्य बिंदु
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन का आरोप लगाया है। एजेंसी की जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अपराध की आय: ED ने जांच में लगभग 600 करोड़ रुपये की अपराध की आय (proceeds of crime) होने का अनुमान लगाया है, जिसमें अचल संपत्तियां और बेनामी लेनदेन शामिल हैं।
- A K इन्फोसिसिम्स मामला: एजेंसी का आरोप है कि 'ए के इन्फोसिसिम्स' नामक कंपनी का उपयोग व्यापार के बजाय जमीन खरीदने के लिए किया गया। बाद में 2014 में इस कंपनी को महज 1 लाख रुपये में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को ट्रांसफर कर दिया गया।
- A B एक्सपोर्ट्स और संदिग्ध लेनदेन: आरोप है कि 'ए बी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' के माध्यम से 2007 में पांच कंपनियों के जरिए 5 करोड़ रुपये घुमाए गए और उसके बाद न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में संपत्ति खरीदी गई।
- जमीन की बिक्री: एजेंसी ने दावा किया है कि राबड़ी देवी ने 7.5 लाख रुपये में खरीदी गई चार जमीन के टुकड़ों को पूर्व आरजेडी विधायक सैयद अबू दोजाना को 3.5 करोड़ रुपये में बेच दिया था।
जांच का दायरा और तलाशी अभियान
ED ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्च 2024 में दिल्ली-एनसीआर, पटना, मुंबई और रांची में 24 स्थानों पर तलाशी ली थी। इन तलाशी अभियानों के दौरान एजेंसी ने भारी मात्रा में बेहिसाब नकदी, विदेशी मुद्रा, सोने के बिस्कुट, सोने के गहने और संपत्तियों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए थे।
उल्लेखनीय है कि हालांकि तेज प्रताप यादव का नाम ED की पूरक अभियोजन शिकायत (supplementary prosecution complaint) में नहीं था, लेकिन अदालत ने उनके खिलाफ भी समन जारी करने के लिए पर्याप्त सामग्री पाई थी।