125 साल का सफर: किशनगंज के लाइन बूढ़ी काली मंदिर में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
किशनगंज के ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी काली मंदिर ने पूरे किए 125 साल। जानें इस मंदिर की अनूठी परंपरा और सवा सौ वर्षों की अटूट आस्था का इतिहास।

किशनगंज के लाइन मोहल्ला में स्थित ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी काली मंदिर इस वर्ष अपनी स्थापना के 125 गौरवशाली वर्ष पूरे करने जा रहा है। वर्ष 1902 में स्थापित यह मंदिर सवा सौ वर्षों से सीमांचल के श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर की इस ऐतिहासिक 125वीं वर्षगांठ और आगामी 8 नवंबर को होने वाली वार्षिक काली पूजा को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह है।
पीढ़ियों से एक ही परिवार संभाल रहा है पूजा की जिम्मेदारी
इस मंदिर की धार्मिक परंपरा बेहद खास है। स्थापना के बाद से ही एक ही पुजारी परिवार की पीढ़ियां मां काली की पूजा-अर्चना कराती आ रही हैं। वर्तमान में मुख्य पुजारी मलय मुखर्जी अपने पूर्वजों की इसी परंपरा को वैदिक विधान के साथ पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं। समय के साथ मंदिर परिसर का विस्तार भी हुआ है, जहां अब एक भव्य शिव मंदिर की भी प्राण-प्रतिष्ठा की जा चुकी है।
अनूठी परंपरा: विसर्जन के बाद ही होती है नई स्थापना
लाइन बूढ़ी काली मंदिर की एक अत्यंत विशिष्ट और अनूठी परंपरा है। वार्षिक काली पूजा शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, पिछले वर्ष स्थापित की गई प्रतिमा का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाता है। इसके पश्चात ही नई प्रतिमा की स्थापना कर पूजनोत्सव की शुरुआत की जाती है।
2054 तक बुकिंग पूरी, तैयारियां अंतिम चरण में
मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालुओं के बढ़ते विश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2054 तक प्रतिमा भेंट करने की बुकिंग पूरी हो चुकी है। 125वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए पूजा कमेटी के सदस्य दिन-रात तैयारियों में जुटे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों को आकर्षक विद्युत सज्जा, भव्य तोरण द्वारों और रोशनी से सजाया जा रहा है।
सुरक्षा और दर्शन के पुख्ता इंतजाम
हजारों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए कतारबद्ध दर्शन और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की जा रही है। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय युवा और प्रबुद्धजन सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- भजन चंद्र पॉल
- अमित कुमार दास
- मनोज मजुमदार
- साधन दास
- सुभजीत शेखर
- बिक्की दास
- देवराज दास
- निखिल पाल
- सुदीप्ता दास
- गौतम मजुमदार
- कुशल दास
- दीपांकर
- दीपक कुमार
- विशाल
- जीत सरकार
- अनिर्बान दास
- अजिताभ राही
- प्रीतम पाल
- कल्याण बोस