यात्रा से बढ़ती है दृष्टि और साहित्य की गहराई: LNMU में सजी चित्र-यात्रा प्रदर्शनी

Ghazala Saheb14 October 20262 min read0 viewsBihar
यात्रा से बढ़ती है दृष्टि और साहित्य की गहराई: LNMU में सजी चित्र-यात्रा प्रदर्शनी

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के हिंदी विभाग में साहित्य और कला का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। यहाँ ‘यात्रा-वृत्तांत’ विषय पर एक विचार गोष्ठी के साथ-साथ ‘चित्र-यात्रा प्रदर्शनी’ का आयोजन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को यात्राओं के विविध अनुभवों और दृश्यों से रूबरू कराया।

छात्रों ने कैमरे में कैद की बिहार से लेकर नेपाल तक की खूबसूरती

हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार के संयोजन में आयोजित इस प्रदर्शनी में शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं की मेहनत साफ नजर आई। विद्यार्थियों ने बिहार, हिमाचल प्रदेश और नेपाल के विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों की यात्राओं के दौरान जो तस्वीरें ली थीं, उन्हें यहाँ प्रदर्शित किया गया।

प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से निम्नलिखित स्थलों के चित्र आकर्षण का केंद्र रहे:

  • बिहार के स्थल: राजनगर, मधुबनी, बोधगया, राजगीर और नालंदा।
  • हिमाचल प्रदेश के स्थल: शिमला, कुल्लू, मनाली, कोकसर और रोहतांग।
  • नेपाल के स्थल: जनकपुरधाम।

इन यात्राओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल इन स्थानों की सुंदरता को कैमरे में उतारा, बल्कि वहां की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गतिविधियों को भी करीब से समझा। इस अनुभव से प्रेरित होकर कई शोधार्थियों और छात्रों ने यात्रा-वृत्तांत आलेख भी लिखे हैं, जिनमें से कुछ पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं।

साहित्य और व्यक्तित्व के विकास में यात्रा का योगदान

कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीता झा ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि "यात्रा व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाने के साथ उसके साहित्यिक अनुभवों को भी समृद्ध करती है।" उन्होंने ऐसी प्रदर्शनियों को शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विजय कुमार ने यात्रा-वृत्तांत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यात्रा से मनुष्य के अनुभव परिष्कृत होते हैं और उसकी दृष्टि व्यापक बनती है। उन्होंने बताया कि कैसे अनेक साहित्यकारों ने इस विधा के माध्यम से पाठकों को विभिन्न क्षेत्रों की जीवनशैली और सामाजिक परिवेश से परिचित कराया है।

"यात्रा साहित्य और कला-सृजन को नई प्रेरणा देती है तथा अनुभूतियों को प्रगाढ़ बनाती है।" — प्रो. उमेश कुमार

प्रो. उमेश कुमार ने हिंदी में यात्रा-वृत्तांत लेखन की परंपरा का उल्लेख करते हुए भारतेन्दु युग से लेकर राहुल सांकृत्यायन, अज्ञेय और नागार्जुन जैसे दिग्गज साहित्यकारों के योगदान को याद किया। वहीं, डॉ. मंजरी खरे और डॉ. बिंदु चौहान ने भी यात्रा को जीवन को नया अर्थ देने वाला और प्रकृति व संस्कृति से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बताया।

इस अवसर पर प्रो. एके बच्चन, प्रो. मुनेश्वर यादव सहित मलय नीरव, सुभद्रा कुमारी, कंचन रजक, जय प्रकाश, रोहित पटेल, स्नेहा कुमारी, बेबी कुमारी, सूफिया खातून, अपर्णा, धीरज, सूरज, सदानंद, प्रतिभा, मनीष सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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