सुपौल के लौकहा में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, 12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत

सुपौल, 06 सितंबर (हि.स.)। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के आदेशानुसार और जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के सचिव अमित गौरव के निर्देश पर रविवार को लौकहा, सुपौल में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता और पारा विधिक स्वयंसेवकों यानी पीएलवी ने ग्रामीणों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत, 12 सितंबर 2026 के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
व्यापारिक विवादों और वैकल्पिक विवाद समाधान की जानकारी
इस दौरान लोगों को कमर्शियल कोर्ट यानी वाणिज्यिक न्यायालय में व्यापारिक विवादों के समाधान के लिए प्री-इंस्टीट्यूशन मेडिएशन एंड सेटलमेंट यानी PIMS तथा वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली यानी ADR के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि वैकल्पिक विवाद समाधान ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पारंपरिक अदालती मुकदमे के बाहर विवादों का समाधान किया जा सकता है। इसके प्रमुख माध्यमों में माध्यस्थम, सुलह और मध्यस्थता शामिल हैं। मध्यस्थता में निष्पक्ष मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर आपसी सहमति से विवाद का समाधान कराने में सहयोग करता है। इसमें मध्यस्थ स्वयं कोई फैसला नहीं थोपता।
कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट और मध्यस्थता की प्रक्रिया
ग्रामीणों को कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 की धारा 12 ए के तहत प्री-इंस्टीट्यूशन मेडिएशन की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि ऐसे वाणिज्यिक विवादों में, जहां तत्काल अंतरिम राहत की आवश्यकता नहीं है, अदालत में वाद दायर करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत मध्यस्थता का प्रयास किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि इस प्रक्रिया में विवाद के पक्षकार द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जाता है। इसके बाद दूसरे पक्ष को नोटिस देकर मध्यस्थता के लिए बुलाया जाता है। दोनों पक्षों की सहमति से प्रशिक्षित मध्यस्थ की सहायता से बातचीत के माध्यम से समाधान का प्रयास किया जाता है। समझौता होने पर सेटलमेंट एग्रीमेंट तैयार किया जाता है, जबकि समझौता नहीं होने की स्थिति में संबंधित रिपोर्ट जारी की जाती है। विधिक जागरूकता कार्यक्रम में मध्यस्थता के लाभों पर भी प्रकाश डाला गया।