रुईधासा महाकाल मंदिर में मां कालरात्रि की पूजा, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Prakriti Singh17 October 20262 min read0 viewsDharm
रुईधासा महाकाल मंदिर में मां कालरात्रि की पूजा, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

किशनगंज के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में शारदीय नवरात्र के सातवें दिन भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। शनिवार को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप, मां कालरात्रि की पूजा के लिए मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए गए। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक और भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया।

गुरु साकेत के सानिध्य में संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान

मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में विधि-विधान के साथ संपन्न हुए। सुबह से ही श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा। भक्त मां के दर्शन कर अपने परिवार की सुख, शांति और मंगल कामना के लिए शीश नवाते दिखे। गौरतलब है कि महाकाल मंदिर में मां दुर्गा के साथ-साथ महाकाल बाबा की भी नियमित पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे यहां की महिमा और भी बढ़ जाती है।

'शुभंकरी' स्वरूप से दूर होते हैं सभी कष्ट

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए पुरोहित गुरु साकेत ने बताया कि नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा:

मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही विकराल हो, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी हैं। उन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है क्योंकि वे भक्तों के कष्टों और बाधाओं को दूर कर उन्हें साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।

गुरु साकेत के अनुसार, मां की आराधना करने से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

गुड़ का भोग और भक्तों की अटूट आस्था

सप्तमी के इस विशेष अवसर पर एक प्राचीन परंपरा का भी पालन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक माता को गुड़ का प्रसाद अर्पित किया। संध्या के समय आयोजित भव्य आरती में बड़ी संख्या में भक्तों ने शिरकत की और माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। नवरात्र के इस पर्व को लेकर मंदिर में उत्सव जैसा उत्साह देखने को मिल रहा है।

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