महाकाल मंदिर में मां कुष्मांडा पूजा, गूंजे वैदिक मंत्र

किशनगंज के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा पूजा किशनगंज के पावन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में आयोजित इस अनुष्ठान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त सुबह से ही माता के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर पहुँच रहे हैं।
सृष्टि की रचयिता का दिव्य स्वरूप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और सृजन की देवी के रूप में पूजा जाता है। गुरु साकेत ने बताया कि जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब देवी की दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड में प्रकाश का संचार हुआ और सृष्टि की उत्पत्ति हुई।
"मां कुष्मांडा का स्वरूप ऊर्जा, प्रकाश, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।"
अष्टभुजा देवी की महिमा
मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। उनके दिव्य स्वरूप की विशेषताएं कुछ इस प्रकार हैं:
- दिव्य आयुध: उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित रहती हैं।
- जपमाला: उनके आठवें हाथ में जपमाला होती है।
- वाहन: देवी सिंह पर सवार होकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
मान्यता है कि मां की आराधना करने से आरोग्य, सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पीले रंग का महत्व और भव्य आरती
नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा में पीले रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु माता को पीले पुष्प और पीले रंग का प्रसाद अर्पित कर अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
महाकाल मंदिर को इस अवसर पर बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर परिसर में मां के जयकारों से वातावरण आध्यात्मिक हो गया है। मंदिर में संध्या के समय एक भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसे लेकर भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।