माँ सीता महिला विश्वविद्यालय पर अभी फैसला नहीं, CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रस्तावित माँ सीता महिला विश्वविद्यालय के संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस पर फिलहाल कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर कोई भी कदम उठाने से पहले सभी संबंधित पक्षों से गहन चर्चा की जाएगी।
हितधारकों से परामर्श के बाद ही होगा निर्णय
मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर को निर्देश दिया है कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय के संबंध में कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी हितधारकों (stakeholders) से परामर्श किया जाए और उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जाए।
सीएम ने आगे कहा कि बिहार विधान परिषद (MLC) के चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद ही इस विषय पर विस्तृत चर्चा और आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया है कि एक ऐसी बैठक आयोजित की जाए जिसमें विश्वविद्यालय से जुड़े सभी पक्षों के विचारों और सुझावों की समीक्षा की जा सके। प्राप्त फीडबैक के आधार पर ही सरकार अपना अंतिम फैसला लेगी।
विरोध और विवाद के बीच सरकार का रुख
गौरतलब है कि 23 सितंबर को बिहार कैबिनेट ने पटना में राज्य के पहले महिला विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी थी, जिसका नाम माँ सीता के नाम पर रखने का प्रस्ताव था। इस फैसले के बाद से ही विवाद खड़ा हो गया है।
पटना के एक महिला कॉलेज के संकाय सदस्यों (faculty members) ने इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय के साथ अपने कॉलेज के जबरन संबद्धता (forced affiliation) के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारी शिक्षक बिहार विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस कानून के तहत राज्य में विशेष बहुविषयक विश्वविद्यालयों के निर्माण का प्रावधान है, जिसमें मुख्यमंत्री को कुलाधिपति (Chancellor) की भूमिका दी गई है।
स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति
विश्वविद्यालय के मुद्दे के साथ-साथ, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में विनिर्माण (manufacturing) क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार की नई पहलों पर भी प्रकाश डाला। पटना के बापू सभागार में आयोजित 'मुख्यमंत्री उद्यमी योजना' के कार्यक्रम में उन्होंने बिहार खरीद वरीयता नीति (Bihar Purchase Preference Policy) का उल्लेख किया।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य राज्य में उद्यमियों को प्रोत्साहित करना और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस नीति की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- बिहार MSME नीति-2026 को भी लॉन्च किया गया है।
- कार्यक्रम के दौरान 7,000 से अधिक लाभार्थियों के खातों में किस्तों की राशि सीधे ट्रांसफर की गई।
- नई नीति के तहत, सरकार केवल उन्हीं उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता देगी जिनका 25% से 40% निर्माण बिहार में किया गया हो।
- यह नियम स्टील, कपड़े और अन्य कच्चे माल की सरकारी खरीद पर भी लागू होगा।
मुख्यमंत्री ने उद्यमियों से अपील की कि वे अपने उत्पादों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर सूचीबद्ध करें ताकि वे सरकारी खरीद प्रक्रिया का लाभ उठा सकें और राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें।