सारण में मढ़ौरा चीनी मिल को पुनर्जीवित करने के लिए एकदिवसीय धरना आयोजित, उठी मांग

सारण में वर्ष 1904 में स्थापित ऐतिहासिक मढ़ौरा चीनी मिल को उसी स्थान पर पुनर्जीवित करने की मांग को लेकर एकदिवसीय धरना आयोजित किया गया। समाजसेवी नीरज कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आंदोलन को और मजबूत बनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह मिल क्षेत्र की औद्योगिक पहचान, किसानों की आय और मजदूरों के रोजगार का मुख्य आधार है।
तरैया में नई मिल की चर्चा पर रोष
बैठक में हाल ही में मढ़ौरा के बजाय तरैया में नई चीनी मिल स्थापित करने की चर्चाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य क्षेत्र के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मढ़ौरा की ऐतिहासिक मिल की कीमत पर कोई विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आधारभूत सुविधाओं का हवाला और मांग पत्र
आंदोलनकारियों का तर्क है कि मढ़ौरा में कृषि क्षेत्र, रेल, सड़क, बिजली, नहर-सिंचाई और बाजार जैसी आधारभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। सरकार को किसी अन्य स्थान के बजाय मढ़ौरा में ही आधुनिक चीनी मिल, एथेनॉल संयंत्र और को-जनरेशन पावर प्लांट स्थापित करने की समयबद्ध कार्ययोजना बनानी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र मढ़ौरा अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा गया। नीरज कुमार ने कहा कि यह लड़ाई किसी दल विशेष की नहीं, बल्कि आम जनता के भविष्य की है। धरना प्रदर्शन के बाद लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।