मध्य प्रदेश में जेन अल्फा के सवालों से घिरी सरकार, बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर उतरे बच्चे

Madhya Pradesh में बड़े-बड़े इन्वेस्टमेंट समिट और ग्लोबल दावों के बीच राज्य के नौनिहाल बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर उतर आए हैं। जेन अल्फा के बच्चे स्कूल की सड़क, बस का किराया और स्कूल की जगह जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 15 अगस्त को छतरपुर के चंदला में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोक दिया था, सिरोंज में छात्राएं बढ़े बस किराये के खिलाफ सड़क पर आ गईं और उज्जैन में छात्राओं ने स्कूल को दूसरी जगह ले जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट घेर लिया। इन घटनाओं में बच्चे किसी राजनीतिक मांग के लिए नहीं बल्कि अपनी पढ़ाई से जुड़ी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
छतरपुर के चंदला में स्कूली बच्चों ने स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की समस्या को लेकर मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोका था, जिसके बाद मंत्री ने सड़क बनवाने का आश्वासन दिया। वहीं विदिशा जिले के सिरोंज में स्कूली छात्राएं निजी बसों का किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये किए जाने के खिलाफ सड़क पर उतरीं और बस स्टैंड पर प्रदर्शन किया। बाद में बस संचालकों को किराया वापस 10 रुपये करने पर सहमत होना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि सिरोंज की सांसद लता वानखेड़े भाजपा की प्रदेश महामंत्री और उज्जैन संभाग की संगठन प्रभारी हैं, और उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह जिला है।
उज्जैन में छात्राओं ने स्कूल को दूसरी जगह ले जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट का घेराव किया और प्रदर्शन के दौरान छात्राएं भावुक हो गईं, जिन्हें प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ। राजधानी भोपाल में भी स्कूली बच्चों के परिवहन संबंधी परेशानी को लेकर सड़क पर आने की खबर सामने आई है। इन सभी मामलों में बच्चों को अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन करना पड़ा, जिससे सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं कि बच्चों की आवाज सड़क तक पहुंचने से पहले शासन की चौखट तक क्यों नहीं पहुंची।