माध्यमा परीक्षा 2027: रिकॉर्ड तोड़ने और नामांकन बढ़ाने का महाअभियान

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने माध्यमा परीक्षा 2027 को लेकर एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने कहा है कि इस बार परीक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी को बढ़ाकर पिछले वर्ष के सभी रिकॉर्ड तोड़े जाएंगे। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कोसी क्षेत्र के संस्कृत विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और छात्रों को परीक्षा के प्रति जागरूक करने हेतु एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
कोसी क्षेत्र के विद्यालयों की समीक्षा बैठक
बोर्ड अध्यक्ष शुक्रवार को सुपौल के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने शहर के आरके पैलेस होटल में सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जिले के संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में माध्यमा परीक्षा 2027 की तैयारियों, विद्यार्थियों के नामांकन, परीक्षा फॉर्म भरने की प्रगति, शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यालयों की बुनियादी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
नामांकन बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास की अपील
मृत्युंजय कुमार झा ने स्पष्ट किया कि परीक्षा में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को निम्नलिखित निर्देश दिए:
- प्रत्येक संस्कृत विद्यालय को योजनाबद्ध तरीके से नामांकन बढ़ाने का अभियान चलाना चाहिए।
- प्रधानाध्यापक और शिक्षक विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों से सीधा संपर्क स्थापित करें।
- संस्कृत शिक्षा के महत्व, इसकी उपयोगिता और भविष्य में उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों के बारे में जानकारी दें।
- सुनिश्चित करें कि जागरूकता के अभाव में कोई भी पात्र विद्यार्थी परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित न रहे।
"संस्कृत भारतीय सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण संवाहक भाषा है। विद्यालयों का विकास तभी संभव है, जब समाज के सभी वर्ग इन संस्थानों से जुड़कर सहयोग करें।"
केवल नामांकन ही नहीं, शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी जोर
बोर्ड अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि विद्यालयों की जिम्मेदारी केवल परीक्षा फॉर्म भरवाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि विद्यालयों में एक ऐसा शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जाए जिससे अभिभावकों का विश्वास मजबूत हो। इसके लिए उन्होंने कुछ मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:
- विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
- गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और समय पर पाठ्यक्रम पूरा करना।
- परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए ठोस रणनीति बनाना।
विद्यालयों की समस्याओं पर हुई चर्चा
समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने अपने संस्थानों से जुड़ी चुनौतियों को बोर्ड अध्यक्ष के समक्ष रखा। चर्चा के दौरान प्रमुख रूप से निम्नलिखित मुद्दे सामने आए:
- मध्याह्न भोजन योजना (Mid-day Meal) की स्थिति।
- विद्यालयों का उन्नयन और अपग्रेडेशन।
- आधारभूत संरचना (Infrastructure) का विकास।
- पठन-पाठन की व्यवस्था और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति।
अध्यक्ष ने पिछले वर्ष के उत्साहजनक परिणामों के लिए सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि अब इस उपलब्धि को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का समय है।