'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारों से गूंजे पिपरा और त्रिवेणीगंज

बिहार के सुपौल जिले में मंगलवार को राजनीतिक सरगर्मी तेज रही। महागठबंधन के संयुक्त आह्वान पर पिपरा और त्रिवेणीगंज में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'वोट चोर, ज्ञानेश मोदी शाह गद्दी छोड़' जैसे तीखे नारे लगाते हुए सरकार के प्रति अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन के अंत में पुतला दहन कर संबंधित नेताओं के इस्तीफे की मांग की गई।
पिपरा में बिनोबा मैदान से प्रखंड मुख्यालय तक प्रदर्शन
पिपरा में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत बिनोबा मैदान से हुई, जहाँ से एक विशाल मार्च निकाला गया। यह मार्च विभिन्न रास्तों से होता हुआ प्रखंड मुख्यालय तक पहुँचा। प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह से चुनावी और राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया:
- कार्यकर्ता हाथों में झंडे और तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े।
- प्रखंड मुख्यालय पहुँचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी पुतला दहन किया।
- नेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और सरकार को घेरा।
त्रिवेणीगंज में चिलौनी नदी तक निकाला गया जुलूस
त्रिवेणीगंज में भी महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया। यहाँ विरोध मार्च की शुरुआत मवेशी अस्पताल परिसर से हुई। यह जुलूस विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए चिलौनी नदी तक पहुँचा। चिलौनी नदी के तट पर कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
इस्तीफे तक जारी रहेगा संघर्ष का संकल्प
इस विरोध प्रदर्शन में भाकपा माले, राजद और माकपा के बड़े नेताओं सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। वक्ताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सरकार को जवाब देने की चुनौती दी।
"जब तक संबंधित लोगों का इस्तीफा नहीं होता, तब तक हमारा आंदोलन और संघर्ष जारी रहेगा।"
नेताओं ने कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक अधिकारों और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से संकल्प लिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और संबंधित लोगों का इस्तीफा नहीं होता, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।