महाकाल मंदिर में गूंजे मां कात्यायनी के जयकारे, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

किशनगंज के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में शारदीय नवरात्र के छठे दिन भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी की विशेष पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
विधि-विधान से हुई मां की आराधना
मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में संपन्न हुआ। नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। मंदिर परिसर पूरी तरह से आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने कतारों में लगकर माता के दर्शन किए और उनके चरणों में शीश नवाया।
यहाँ न केवल मां दुर्गा, बल्कि महाकाल बाबा की भी नियमित पूजा की जाती है। संध्या के समय आयोजित होने वाली आरती में भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
क्यों खास है मां कात्यायनी की पूजा?
पुरोहित गुरु साकेत ने बताया कि मां कात्यायनी की आराधना से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा भी काफी प्रचलित है।
पौराणिक कथा और देवी का स्वरूप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लिया था, जिसके कारण उनका नाम मां कात्यायनी पड़ा।
मां का स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य है:
- वाहन: सिंह
- शस्त्र और प्रतीक: हाथों में तलवार और कमल का फूल
- मुद्रा: वरमुद्रा और अभयमुद्रा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कात्यायनी ने ही महिषासुर का वध किया था। उन्हें साहस, आत्मविश्वास और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने वाली शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना भक्तों को जीवन की कठिनाइयों से लड़ने और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
भक्तों ने मांगी खुशहाली की दुआ
नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता के समक्ष अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पूरे क्षेत्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मंदिर में चारों ओर भक्तिमय माहौल बना हुआ है और श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है।