महारानी कामसुन्दरी साहिबा की स्मृति में महिला सम्मान पुरस्कार का सुझाव
दरभंगा में महारानी कामसुन्दरी साहिबा की 94वीं जयंती पर श्रद्धांजलि सभा में उनके नाम पर महिला सम्मान पुरस्कार शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया।

दरभंगा में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन के तत्वावधान में स्वर्गीय महारानी कामसुन्दरी साहिबा की 94वीं जयंती पर एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जुटे विद्वानों, शिक्षाविदों और इतिहासकारों ने महारानी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और समाज के उत्थान में उनके सांस्कृतिक योगदान को याद किया। इस दौरान महारानी कामसुन्दरी साहिबा महिला सम्मान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने का सुझाव भी दिया गया।
महिला सम्मान पुरस्कार का प्रस्ताव
सभा के दौरान एक महत्वपूर्ण विचार सामने आया जिससे उपस्थित जनसमूह काफी प्रभावित हुआ। प्रो. शिरीष चन्द्र चौधरी ने सुझाव दिया कि महारानी कामसुन्दरी साहिबा की गौरवशाली स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए उनके नाम पर एक 'महिला सम्मान पुरस्कार' शुरू किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव का उद्देश्य समाज में महिलाओं के योगदान को पहचान देना और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।
सांस्कृतिक विरासत और भाषा का संरक्षण
कार्यक्रम में वक्ताओं ने मिथिला की पहचान और धरोहरों को बचाने पर भी गहन चर्चा की। मुख्य वक्ता प्रो. इंदिरा झा ने कहा कि ऐतिहासिक स्मृतियों और धरोहरों का संरक्षण करना समाज की ऐतिहासिक चेतना के लिए अनिवार्य है। वहीं, प्रो. पुतुल सिंह ने मैथिली भाषा, लोक संस्कृति के संरक्षण और महिला सशक्तीकरण को समाज की प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
इतिहास और दस्तावेजों का महत्व
मिथिलांचल के गौरवशाली इतिहास को सहेजने के लिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव और विचार साझा किए:
- डॉ. अवनीन्द्र कुमार झा: उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों के संकलन और उनके प्रामाणिक दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
- डॉ. मंज़र सुलैमान: उन्होंने मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने में दरभंगा राज के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।
- डॉ. जमील हसन अंसारी: उन्होंने ऐतिहासिक स्मृतियों को सुरक्षित रखने की अनिवार्यता पर जोर दिया।
इस श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता पंडित डॉ. रामचन्द्र झा ने की। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने यह भी मांग की कि महारानी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष इस तरह के गरिमामयी कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। इससे पूर्व, फाउंडेशन के कार्यपालक पदाधिकारी श्रुतिकर झा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया था।