महाराष्ट्र के सूखे का समाधान? विशेषज्ञों ने सुझाया गुजरात का 'वॉटर मॉडल'

महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। हाल ही में IIM बैंगलोर में पेश किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार, महाराष्ट्र अपने जल संकट को दूर करने के लिए गुजरात के सफल जल प्रबंधन (Water Governance) मॉडल से सबक ले सकता है।
क्या है गुजरात का सफल जल मॉडल?
इस अध्ययन के लेखकों में भारत सरकार के पेयजल और स्वच्छता विभाग के पूर्व सचिव परमेश्वरन अय्यर भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात ने पिछले 25 वर्षों में जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक शानदार सफर तय किया है। यह यात्रा 2001 में तब शुरू हुई थी जब गुजरात एक जल-अभाव वाले राज्य के रूप में संघर्ष कर रहा था।
अध्ययन में गुजरात की कुछ प्रमुख रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया है, जिन्हें महाराष्ट्र में भी लागू किया जा सकता है:
- नर्मदा आधारित जल ग्रिड: नदी आधारित जल वितरण प्रणाली का प्रभावी उपयोग।
- संस्थागत ढांचा: WASMO जैसी संस्थाओं के माध्यम से जल प्रबंधन।
- जल संरक्षण: स्थानीय स्तर पर पानी बचाने के ठोस प्रयास।
- अपशिष्ट जल प्रबंधन: गंदे पानी को एक नए संसाधन के रूप में इस्तेमाल करना।
कृषि और किसानों की भूमिका सबसे अहम
परमेश्वरन अय्यर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में लगभग 85 से 90 प्रतिशत पानी का उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल तकनीक बदलना काफी नहीं है, बल्कि किसानों की आय को भी ध्यान में रखना होगा।
"जब तक किसान की आय बेहतर नहीं होगी, वह व्यवहार बदलने के लिए तैयार नहीं होगा। हमें कम पानी वाली फसलों और बेहतर आय के बीच संतुलन बनाना होगा। गुजरात के उपायों को महाराष्ट्र की परिस्थितियों के अनुसार ढालकर लागू किया जा सकता है।"
महाराष्ट्र में सूखे का मौजूदा संकट
वर्तमान में महाराष्ट्र के हालात काफी चुनौतीपूर्ण हैं। राज्य के 265 से अधिक तालुकों में सूखा घोषित किया जा चुका है और राहत कार्यों की घोषणा की गई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, देवेंद्र फडणवीस ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। फडणवीस ने शाह को राज्य में सूखे से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (