MPSC पेपर लीक मामला: महाराष्ट्र सरकार ने गठित की जांच कमेटी

Prakriti Singh12 October 20262 min read0 viewsMaharashtra
MPSC पेपर लीक मामला: महाराष्ट्र सरकार ने गठित की जांच कमेटी

महाराष्ट्र की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के आरोपों ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। MPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य MPSC भर्ती अनियमितता जांच को निष्पक्ष रूप से पूरा करना और छात्रों की शिकायतों का समाधान करना है।

जांच समिति में कौन-कौन शामिल?

सरकार द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। इस महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंधे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।

समिति के अन्य महत्वपूर्ण सदस्यों में शामिल हैं:

  • लक्ष्मी गौतम: आईपीएस (IPS) अधिकारी
  • गणेश पाटिल: पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी
  • पी. डी. नाईक: सेवानिवृत्त न्यायाधीश

महाराष्ट्र के मंत्री शिवेंद्रराज भोसले ने पुणे में चल रहे छात्र आंदोलनों और उम्मीदवारों की मांगों पर चर्चा करने के बाद इस निर्णय की घोषणा की है।

छात्रों का आंदोलन और प्रमुख मांगें

पिछले कई दिनों से पुणे में छात्र MPSC परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लिया जाए।
  • अगले तीन वर्षों में 70,000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जाए।
  • जनवरी में होने वाली ग्रुप-सी (Group-C) परीक्षा के लिए रिक्तियों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • MPSC अध्यक्ष विवेक भीमवार को उनके पद से हटाया जाए।

MPSC अध्यक्ष पर गिरी गाज

छात्रों के बढ़ते दबाव और आंदोलन के बीच, सरकार ने MPSC अध्यक्ष विवेक भीमवार को जांच पूरी होने तक अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया है। हालांकि, सरकार ने अभी तक उनके पद से हटने की मांग पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।

वहीं, विवेक भीमवार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:

"राज्य सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है। मैंने अपने पूरे जीवन में हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता दी है। इसलिए, मैंने जांच पूरी होने तक पद पर बने रहने के बजाय छुट्टी पर जाने का निर्णय लिया है। छात्रों के हित हमेशा मेरी प्राथमिकता रहे हैं।"

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद 22 मार्च को आयोजित की गई स्क्रीनिंग परीक्षा से जुड़ा है, जो ड्रग इंस्पेक्टर के पदों के लिए आयोजित की गई थी। उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि परीक्षा से दो दिन पहले, यानी 20 मार्च को ही प्रश्नपत्र लीक हो गए थे और उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया गया था। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए MPSC ने उस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। अब गठित की गई

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