महेश भूपति एआईटीए में शामिल: कहा- सिस्टम नहीं तो टूर्नामेंट का क्या फायदा?
महेश भूपति और सानिया मिर्जा एआईटीए कार्यकारी समिति में शामिल हुए। भूपति ने भारतीय टेनिस के लिए एक मजबूत और व्यवस्थित ढांचे की मांग की है।

भारतीय टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी महेश भूपति एआईटीए (AITA) की कार्यकारी समिति में शामिल होने के बाद देश में टेनिस के विकास को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कह रहे हैं। उन्होंने भारत में टेनिस के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक मजबूत और व्यवस्थित ढांचे की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।
महेश भूपति और सानिया मिर्जा को एआईटीए की जनरल बॉडी में उत्कृष्ट योग्यता वाले खिलाड़ियों के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया था। इसके बाद, गुरुवार को दोनों को एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में भी निर्वाचित कर लिया गया।
टूर्नामेंट्स से ज्यादा जरूरी है खिलाड़ियों का विकास
महेश भूपति का मानना है कि भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट आयोजित करने का तब तक कोई विशेष लाभ नहीं है, जब तक हमारे खिलाड़ी उन अवसरों का लाभ उठाकर वैश्विक स्तर पर सफल न हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि टूर्नामेंट तभी देश के लिए सार्थक होते हैं जब हमारे खिलाड़ी उनमें जीत हासिल कर रैंकिंग पॉइंट कमा सकें और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
"हमारे देश में कोई सिस्टम नहीं है, इसलिए हमें एक सिस्टम और एक ढांचा बनाना होगा... यदि हमारे पास बड़े टूर्नामेंटों में सफल होने में सक्षम खिलाड़ी नहीं हैं, तो इतने सारे टूर्नामेंट आयोजित करने का क्या मतलब है? मेरी राय में, टूर्नामेंट तभी देश के लिए फायदेमंद होते हैं जब हमारे खिलाड़ी जीतें।"
भूपति ने अपने करियर के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे चेन्नई ओपन में लींडर पेस के साथ उनकी जीत ने उनके लिए वैश्विक मंच के दरवाजे खोले थे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सानिया मिर्जा ने भी अपना पहला WTA खिताब हैदराबाद में जीता था। उनका कहना है कि टूर्नामेंटों का असली मूल्य तभी है जब खिलाड़ी उनका लाभ उठाकर आगे बढ़ सकें।
लींडर पेस ने भी उठाई सुधार की मांग
वहीं, पूर्व टेनिस खिलाड़ी लींडर पेस ने एआईटीए के पेशेवरकरण (professionalization) की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि खेल के विकास के लिए प्रशासनिक विखंडन को दूर करना और संस्था को अधिक पेशेवर बनाना बेहद जरूरी है।
पेस ने सुझाव दिया कि टेनिस जैसे वैश्विक खेल में निवेश की आवश्यकता है, जो केवल महानगरों तक सीमित न रहकर ग्रामीण भारत के कोने-कोने तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण प्रतिभाओं को शहरों में आकर अपने कौशल को निखारने के लिए पर्याप्त अवसर और संसाधन मिलने चाहिए।