सुपौल में मैथिली साहित्य का संगम: पांच नई पुस्तकों का हुआ भव्य लोकार्पण

बिहार के सुपौल जिले में साहित्य की महक बिखरी है। जिला मुख्यालय के भेलाही स्थित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र के आवास पर शनिवार को एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। किसुन संकल्प लोक के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सुपौल में मैथिली पुस्तकों का लोकार्पण किया गया, जिससे स्थानीय साहित्य जगत में भारी उत्साह देखा गया।
डॉ. इन्द्रकान्त झा और आशीष चमन की कृतियों का विमोचन
इस साहित्यिक समारोह में विभिन्न विधाओं की रचनाओं को पाठकों के सामने लाया गया। पटना विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक और वरिष्ठ लेखक डॉ. इन्द्रकान्त झा की तीन महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण किया गया, जिनमें शामिल हैं:
- ऑक्सीजन: डॉ. झा का नया कथा-संग्रह।
- मैथिलीक आंगनमे मलयालम कविताक पथार: मलयालम कविताओं का मैथिली में किया गया अनूठा अनुवाद।
- हाइकु-संग्रह: जापानी काव्य शैली पर आधारित रचनाओं का संग्रह।
इसके साथ ही, सुपौल के चकला निर्मली निवासी प्रसिद्ध कथाकार और समीक्षक आशीष चमन की दो पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। उनकी रचनाओं में भरि रातिक कथा (कथा-संग्रह) और शब्दक यात्रा (आलोचनात्मक निबंध-संग्रह) प्रमुख हैं।
साहित्यकारों ने की रचनात्मकता की सराहना
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र ने डॉ. इन्द्रकान्त झा की लेखकीय सक्रियता की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस उम्र में भी उनकी साहित्य-साधना नई पीढ़ी के रचनाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। वहीं, लेखक-संपादक केदार कानन ने मलयालम कविताओं के मैथिली अनुवाद को एक सराहनीय कदम बताया, जिससे मैथिली पाठकों को नई संवेदनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार साझा किए:
- कुमार विक्रमादित्य: उन्होंने कहा कि आशीष चमन का निबंध-संग्रह 'शब्दक यात्रा' मैथिली आलोचना की परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।
- सुस्मिता पाठक: उन्होंने हाइकु-संग्रह के प्रकाशन को मैथिली साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
- दीपिका चन्द्रा: उन्होंने आशीष चमन की कहानियों में प्रयुक्त ठेठ शब्दों और विषय-वस्तु की सहजता की विशेष सराहना की।
भाषा के उज्ज्वल भविष्य का संकेत
कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए लेखक एवं फिल्म एक्टिविस्ट किसलय कृष्ण ने कहा कि मैथिली साहित्य में विभिन्न विधाओं का यह निरंतर प्रवाह और नए विषयों पर लेखन भाषा के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। इस अवसर पर गिरिबाला झा, आशीष चमन, मनोज कुमार, राजा झा सहित कई अन्य साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।