मेरठ में लेखपाल पर फर्जी निस्तारण और जमीन पैमाइश में गड़बड़ी का गंभीर आरोप, सीएम योगी से शिकायत

मेरठ के किठौर थाना क्षेत्र के नंगला सलेमपुर निवासी योगेंद्र कुमार ने राजकीय इंटर कॉलेज की जमीन की पैमाइश और कथित कब्जे के मामले में लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की गई है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- राजकीय इंटर कॉलेज की जमीन की पैमाइश और सीमा से जुड़ी शिकायतों का समाधान किए बिना ही जनसुनवाई पोर्टल पर फर्जी निस्तारण दिखाने का आरोप।
- मुख्यमंत्री पोर्टल पर 11 मार्च, 6 जुलाई और इसके बाद तीन बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समाधान न मिलने का दावा।
- खसरा नंबर 154, 155 और 156 की पैमाइश में गड़बड़ी कर शिजरे के मुकाबले मौके पर लंबाई करीब 10 मीटर अधिक दिखाने का आरोप।
- लेखपाल पर पैसे लेकर पैमाइश में गड़बड़ी करने और कॉलेज की जमीन पर कब्जा कर गन्ने की फसल उगाने का गंभीर आरोप।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर तीन बार शिकायत के बाद भी नहीं मिला समाधान
शिकायतकर्ता योगेंद्र कुमार के मुताबिक उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज की बाउंड्री की पैमाइश और संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने के लिए 11 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसका संदर्भ संख्या 40013826009966 है। योगेंद्र कुमार का आरोप है कि संबंधित लेखपाल ने 9 अप्रैल 2026 को शिकायत का निस्तारण कर दिया, लेकिन मौके पर समस्या का समाधान नहीं हुआ और उन्हें पैमाइश की अपेक्षित रिपोर्ट भी नहीं मिली। पहली शिकायत से संतुष्ट नहीं होने पर उन्होंने 6 जुलाई 2026 को दोबारा शिकायत दर्ज कराई, जिसका संदर्भ संख्या 40013826032339 है। आरोप है कि इस शिकायत को भी 5 अगस्त 2026 को निस्तारित दिखा दिया गया। इसके बाद योगेंद्र कुमार ने तीसरी बार शिकायत दर्ज कराई, जिसका संदर्भ संख्या 40013826032440 बताया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसे भी 6 अगस्त 2026 को निस्तारित कर दिया गया, जबकि उनके अनुसार जमीन की पैमाइश और कब्जे से जुड़ी मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ। मामले को लेकर पीड़ित योगेंद्र कुमार का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
खसरा नंबर 154, 155 और 156 की पैमाइश पर सवाल
शिकायत में खसरा नंबर 154, 155 और 156 का उल्लेख किया गया है। योगेंद्र कुमार का आरोप है कि राजस्व अभिलेख और मौके की स्थिति में कथित अंतर है। उनका दावा है कि शिजरे के अनुसार संबंधित खसरा नंबरों की लंबाई करीब 120 मीटर है, जबकि मौके पर लंबाई करीब 130 मीटर दिखाई जा रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित रूप से 10 मीटर का यह अंतर राजकीय इंटर कॉलेज की जमीन की सीमा को प्रभावित कर रहा है।
लेखपाल पर पैसे लेकर पैमाइश में गड़बड़ी और कब्जे का आरोप
योगेंद्र कुमार ने शिकायत में लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कथित रूप से कुछ भूमि मालिकों और भूमाफिया को लाभ पहुंचाने के लिए पैमाइश में गड़बड़ी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज की जमीन की लंबाई कम करके निजी खेतों की लंबाई बढ़ाई गई है। हालांकि, रिश्वत लेने, मिलीभगत और भूमाफिया से संबंध होने जैसे आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि राजकीय इंटर कॉलेज की जमीन पर कथित रूप से कब्जा कर वहां गन्ने की फसल उगा दी गई है। उनका कहना है कि यदि शिजरे और राजस्व अभिलेखों के अनुसार मौके पर दोबारा पैमाइश कराई जाए तो पूरी स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और राजस्व अधिकारियों की टीम भेजकर जमीन की वास्तविक पैमाइश कराने की मांग की है।
शिजरे के अनुसार पैमाइश और जमीन कब्जामुक्त कराने की मांग
योगेंद्र कुमार ने मांग की है कि खसरा नंबर 154, 155 और 156 की शिजरे के अनुसार निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए। इसके साथ ही राजकीय इंटर कॉलेज की भूमि की वास्तविक सीमा निर्धारित कर यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे नियमानुसार हटाया जाए। उन्होंने पैमाइश की रिपोर्ट उपलब्ध कराने और जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायतों के निस्तारण की भी जांच कराने की मांग की है। तीन बार शिकायत करने और हर बार निस्तारण होने का दावा करने वाले योगेंद्र कुमार ने अब मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कागजों में शिकायतों का निस्तारण दिखाने के बजाय मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए। फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित लेखपाल अथवा अन्य पक्ष का पक्ष सामने नहीं आया है। प्रशासनिक और राजस्व जांच के बाद ही जमीन की वास्तविक पैमाइश, कथित कब्जे और शिकायतों के निस्तारण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।