पंजाब में नशे का आतंक: हत्याओं और आत्महत्या पर गृह मंत्रालय सख्त

Ghazala Saheb16 October 20263 min read0 viewsBihar
पंजाब में नशे का आतंक: हत्याओं और आत्महत्या पर गृह मंत्रालय सख्त

पंजाब में नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार और उससे जुड़ी हिंसक घटनाओं ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने राज्य में नशाखोरी से जुड़ी हत्याओं और एक दुखद आत्महत्या के मामले को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने पंजाब सरकार को तीन अलग-अलग पत्र लिखकर इन घटनाओं पर विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। ये पत्र पंजाब के मुख्य सचिव को भेजे गए हैं और इसकी एक प्रति पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी उपलब्ध कराई गई है।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले की हत्या

मंत्रालय ने 13 अक्टूबर को मानसा में हुई परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। परविंदर सिंह पंजाब में नशीली दवाओं की अंधाधुंध बिक्री और उनके दुरुपयोग के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चला रहे थे। उनकी हत्या के बाद राज्य में काफी विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। गृह मंत्रालय ने इस घटना के पूरे विवरण और अब तक पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

गुरदासपुर में नशीले पदार्थों से जुड़ा जानलेवा हमला

मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरदासपुर जिले के बटाला तहसील के अंतर्गत आने वाले मारी पन्वान गांव में हुए हमले ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ बिक्रमजीत सिंह, निशान सिंह और गुरमुख सिंह पर जानलेवा हमला किया गया था, जिसमें बिक्रमजीत सिंह की जान चली गई और अन्य दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। गृह मंत्रालय ने इस हमले को नशीले पदार्थों के कारोबार से जोड़कर देखा है और कानून-व्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मंत्री पर आरोप और एक पिता की आत्महत्या

तीसरा मामला 8 सितंबर को गुलजार सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है, जो बेहद संवेदनशील है। गुलजार सिंह के बेटे नशे के आदी थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुलजार सिंह ने अपने क्षेत्र में सिंथेटिक ड्रग्स की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे और मरने से पहले पंजाब सरकार के एक मंत्री पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया, जिससे तंग आकर उन्होंने आत्महत्या कर ली। मंत्रालय ने इस घटना पर बढ़ते सार्वजनिक आक्रोश को देखते हुए जवाब मांगा है।

ड्रग-फ्री इंडिया के लिए केंद्र का 'विजन डॉक्यूमेंट'

इन घटनाओं के बीच, गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से 10 अगस्त, 2026 को मुख्यमंत्री के साथ साझा किए गए 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)' पर की गई प्रगति का भी अपडेट मांगा है। इस दस्तावेज का मुख्य लक्ष्य भारत को नशा मुक्त बनाना है। इसके तहत कुछ महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाए जाने हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF): एक समर्पित टास्क फोर्स का गठन या पुनर्गठन करना।
  • वित्तीय जांच: नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल लोगों की अनिवार्य वित्तीय जांच करना।
  • NCORD तंत्र: नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर के माध्यम से परिणाम-आधारित समीक्षा करना।
  • NDPS अदालतें: विशेष अदालतों का निर्धारण और कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क: सीमा पार से संचालित होने वाले ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।

गृह मंत्रालय की इस सख्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में अब राज्य सरकार की जवाबदेही और भी बढ़ गई है।

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