मध्याह्न भोजन का संकट: 5 महीने से नहीं मिला पैसा, अंडे की दर पर भी बवाल

बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों के पोषण का आधार मानी जाने वाली मध्याह्न भोजन योजना अब संकट में नजर आ रही है। किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
महीनों से बकाया है फंड, आपूर्ति पर बढ़ा संकट
सांसद डॉ. जावेद आजाद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि किशनगंज सहित बिहार के विभिन्न जिलों में पिछले लगभग चार से पांच महीनों से मध्याह्न भोजन योजना की राशि लंबित है। इस देरी के कारण स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली खाद्य सामग्री की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
- खाद्य सामग्री की नियमित आपूर्ति में कठिनाइयां आ रही हैं।
- स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) का भुगतान लंबे समय से बकाया है।
- बकाये के कारण योजना के संचालन पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
अंडे की दर और बाजार मूल्य में भारी अंतर
योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले पोषण में एक बड़ी तकनीकी समस्या अंडे की निर्धारित दर को लेकर है। सांसद ने इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वर्तमान बाजार में एक अंडे की कीमत लगभग आठ से नौ रुपये है, जबकि मध्याह्न भोजन योजना के तहत इसके लिए मात्र पांच रुपये ही निर्धारित किए गए हैं।
बाजार मूल्य और निर्धारित दर के बीच इस बड़े अंतर के कारण आपूर्तिकर्ताओं के लिए अंडे की सप्लाई करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सांसद ने मांग की है कि सरकार अंडे की दर का पुनरीक्षण करे और इसे मौजूदा बाजार मूल्य के अनुरूप बढ़ाए, ताकि बच्चों को मिलने वाले पोषण में कोई कमी न आए।
बच्चों के पोषण और उपस्थिति पर पड़ेगा असर
मध्याह्न भोजन योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उचित पोषण देना और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। सांसद ने आगाह किया है कि यदि राशि के भुगतान में देरी जारी रही और आपूर्ति संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो इस महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन पर बुरा असर पड़ सकता है।
अब राज्य सरकार द्वारा इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी स्कूलों और आपूर्तिकर्ताओं की निगाहें टिकी हुई हैं।