मीका सिंह दलेर मेहंदी विवाद: मंत्री सुबोध उनियाल से मांगी माफी
मीका सिंह दलेर मेहंदी विवाद गहराया। मीका सिंह ने मंत्री सुबोध उनियाल से माफी की मांग की है।

गायक मीका सिंह दलेर मेहंदी के अपमान को लेकर काफी गुस्से में हैं। उन्होंने उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल पर अपने भाई के प्रति मंच से अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। मीका सिंह ने मांग की है कि मंत्री को इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब नरेंद्र नगर के सिद्धपीठ मां कुंजपुरी पर्यटन और विकास मेले में दलेर मेहंदी अपनी प्रस्तुति दे रहे थे। आरोप है कि मंत्री सुबोध उनियाल ने उनके गायन में हस्तक्षेप किया और मंच से ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो एक कलाकार की गरिमा के विरुद्ध है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में मंत्री को दलेर मेहंदी की गायन क्षमता पर सवाल उठाते हुए सुना जा सकता है।
मंत्री ने बाद में दावा किया कि उन्होंने दलेर मेहंदी से इसलिए सवाल किए क्योंकि उन्हें लगा कि वह लाइव गाने के बजाय लिप-सिंकिंग कर रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि कलाकार को 35 लाख रुपये दिए गए थे और वह शो के संचालन से खुश नहीं थे।
मीका सिंह ने जताई कड़ी नाराजगी
मीका सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए लिखा कि कलाकारों को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा:
"मंत्री सुबोध उनियाल जी ने मंच पर जिस तरह से बात की, वह बेहद अभद्र और अपमानजनक था। एक कलाकार सम्मान का हकदार है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।"
मीका सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा करते हुए उनसे अनुरोध किया है कि वे मंत्री से एक वीडियो संदेश जारी करवाएं, जिसमें वे दलेर मेहंदी से माफी मांगें और स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार कलाकारों को उत्तराखंड आने से हतोत्साहित कर सकता है।
शराब और स्वास्थ्य पर सफाई
विवाद के दौरान यह भी दावा किया गया था कि दलेर मेहंदी नशे की हालत में थे। मीका सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- दलेर मेहंदी शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करते हैं।
- वह पिछले दो वर्षों से अस्वस्थ हैं और अभी भी रिकवरी कर रहे हैं।
- हाल ही में उनका एक ऑपरेशन भी हुआ है।
मीका ने आगे कहा कि कई कलाकार आजकल बैकअप ट्रैक का उपयोग करते हैं, लेकिन किसी को इस तरह से सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सम्मान एक दोतरफा रास्ता है और सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को जिम्मेदारी और विनम्रता के साथ व्यवहार करना चाहिए।