वीरंगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दहाड़ेंगे चीते, सीएम मोहन यादव करेंगे विमोचन

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए वीरंगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को आजाद करने जा रहे हैं। कुनो नेशनल पार्क से लाए गए ये चीते अब इस रिजर्व में अपना नया बसेरा बनाएंगे। इस महत्वपूर्ण पहल के साथ ही मध्य प्रदेश में चीतों के लिए कुनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद यह तीसरा प्रमुख आवास बन जाएगा।
कुनो से आएंगे दो नए चीते
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन दो चीतों में एक नर चीता 'थलो' और एक मादा चीता 'CCB-3' शामिल है। इन्हें कुनो नेशनल पार्क से विशेष रूप से इस रिजर्व के लिए लाया जा रहा है। चीतों के सुरक्षित आगमन और उनके नए वातावरण में सहजता से ढलने के लिए वन विभाग ने लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए हैं।
चीतों की सुरक्षा और उनके अनुकूलन के लिए निम्नलिखित सुविधाएं तैयार की गई हैं:
- आधुनिक बाड़े: चीतों के लिए सुरक्षित और आधुनिक बाड़े (bomas) बनाए गए हैं।
- निगरानी और स्वास्थ्य: वन विभाग ने चीतों की नियमित निगरानी और उनके स्वास्थ्य देखभाल के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
- पारिस्थितिकी तंत्र: क्षेत्र में रहने वाले अन्य वन्यजीवों के लिए भी एक सुरक्षित और उपयुक्त पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड क्षेत्र और विशेष रूप से सागर जिले में वन्यजीव पर्यटन को जबरदस्त गति मिलने की उम्मीद है। इस कदम से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नए द्वार खुलेंगे।
चीतों के आने से होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, परिवहन सेवाओं, टूरिस्ट गाइड और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वीरंगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की खासियत
वीरंगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे पहले नौरदेही टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाता था, मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यह सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। 1997 में स्थापित इस अभयारण्य को 20 सितंबर, 2023 को टाइगर रिजर्व का आधिकारिक दर्जा दिया गया था। यहाँ बाघ, तेंदुए, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे विविध वन्यजीव पाए जाते हैं।
देश में चीतों की स्थिति
भारत में चीतों के पुनरुद्धार कार्यक्रम ने बड़ी सफलता हासिल की है। 5 अक्टूबर, 2026 तक देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। यह वृद्धि कुनो नेशनल पार्क में एक भारतीय मूल की मादा चीता (KJP21)