MP में मछली उत्पादन होगा दोगुना, 1 लाख केज कल्चर यूनिट्स की तैयारी: CM मोहन यादव

मध्य प्रदेश में मछली उत्पादन दोगुना करने के लिए 1 लाख केज कल्चर यूनिट्स लगाने की योजना है। CM मोहन यादव ने भोपाल में बड़ी घोषणा की।

Ghazala Saheb23 October 20262 min read0 viewsBihar
MP में मछली उत्पादन होगा दोगुना, 1 लाख केज कल्चर यूनिट्स की तैयारी: CM मोहन यादव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भोपाल में आयोजित 'नेशनल फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026' में उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार अपनी 'इंटीग्रेटेड फिशरीज पॉलिसी-2026' के माध्यम से मछली उत्पादन को दोगुना करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य निवेश, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देकर मध्य प्रदेश को देश का एक प्रमुख मत्स्य केंद्र बनाना है।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर इस सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया।

केज कल्चर और MSME के जरिए रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में मत्स्य पालन को आधुनिक बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाने की बात कही। उन्होंने घोषणा की कि पूरे प्रदेश में एक लाख केज कल्चर यूनिट्स स्थापित करने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य मत्स्य पालन को खाद्य प्रसंस्करण (food processing) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के साथ जोड़ना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस एकीकरण से निम्नलिखित लाभ होंगे:

  • मछली उत्पादन के बाद उसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में सुधार होगा।
  • मूल्य संवर्धन (value addition) के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी।
  • मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा।

इस अवसर पर रायसेन जिले के बरना जलाशय में राज्य के पहले सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) आधारित केज कल्चर प्रोजेक्ट का भी शुभारंभ किया गया, जिसमें 500 केज शामिल हैं।

जल संसाधनों का बहुआयामी उपयोग

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के जल संसाधनों का प्रबंधन अब केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि पानी का उपयोग पीने के पानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, जल पर्यटन और जलीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार संरक्षित वन क्षेत्रों में भी बड़े जल निकायों को विकसित करने पर काम कर रही है। इससे न केवल वन्यजीवों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि मत्स्य पालन के नए अवसर भी पैदा होंगे।

निर्यात को बढ़ावा और भविष्य की बुनियादी संरचना

सम्मेलन के दौरान 'मध्य प्रदेश फिशरीज इन्वेस्टमेंट एंड एक्सपोर्ट गाइड-2026' और निर्यात पोर्टल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की गई। मुख्यमंत्री ने निवेशकों और स्टार्टअप्स को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित किया।

निर्यात के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ जैसी समस्याओं के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इन कठिन परिस्थितियों से सफलतापूर्वक निपटने में सक्षम रहा है।

भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए, मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य में जल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी, जिससे मत्स्य उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि संभव होगी।

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