पुणे MPSC आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन, रोहित पवार और जारंगे पाटिल ने सरकार को घेरा

पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन को अब राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिलने लगा है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार और मराठा कार्यकर्ता मनोज जारंगे पाटिल ने छात्रों के साथ खड़े होकर राज्य सरकार से उनकी मांगों को तुरंत पूरा करने और प्रक्रिया को बाधित न करने की मांग की है।
छात्रों के सपनों के साथ न खेलें: रोहित पवार
एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान में पूरा ध्यान एमपीएससी के मुद्दे पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि इस प्रक्रिया को तब तक न रोका जाए जब तक कि यह अपने पूर्ण दायरे तक न पहुंच जाए। यदि इसे अभी रोका गया, तो यह सरकार को बहुत महंगा पड़ेगा।"
वहीं, एनसीपी (एसपी) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने भी छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा में पेपर लीक हुआ है, तो यह छात्रों के साथ सरासर अन्याय है। आव्हाड ने भावुक होते हुए कहा, "छात्रों की आंखों में एक सपना है, कृपया उनके सपनों को न मारें। यदि अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान पेपर लीक की घटना हुई है, तो उन्हें इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी।"
मनोज जारंगे पाटिल ने जताया छात्रों का दर्द
मराठा कार्यकर्ता मनोज जारंगे पाटिल ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और सरकार से छात्रों का भरोसा जीतने की अपील की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों को सड़कों पर क्यों उतरना पड़ रहा है? जारंगे पाटिल ने कहा, "अगर छात्रों को 10 साल तक पढ़ाई करनी पड़ती है और फिर विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर आना पड़ता है, तो उन वर्षों की शिक्षा का क्या मतलब रह जाता है? सरकार को जल्द से जल्द उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए। ये आपके बच्चे भी हैं।"
शरद पवार ने संवाद की सलाह दी
इससे पहले, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने भी महाराष्ट्र सरकार से छात्रों के साथ संवाद करने और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि पुणे, मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में छात्रों के बीच बढ़ता असंतोष चिंता का विषय है और सरकार व शैक्षणिक संस्थानों को इस स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।
क्या है पूरा मामला?
एमपीएससी ने 22 मार्च को आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में कथित कदाचार की शिकायतों के बाद एक प्रारंभिक जांच शुरू की थी। इस परीक्षा के बाद 506 उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए पात्र पाए गए थे, जिनमें से 488 उम्मीदवारों का साक्षात्कार जुलाई के दौरान आयोजित किया गया था। अब छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।