मुंगेर के पादुका दर्शन में लक्ष्मीनारायण यज्ञ शुरू, स्वामी निरंजनानंद ने बताई यज्ञ की महिमा

Akhand India Desk8 September 20261 min read3 viewsDharm
मुंगेर के पादुका दर्शन में लक्ष्मीनारायण यज्ञ शुरू, स्वामी निरंजनानंद ने बताई यज्ञ की महिमा

बिहार के मुंगेर स्थित पादुका दर्शन में मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार, संकीर्तन और गुरु-स्मरण के साथ लक्ष्मीनारायण यज्ञ का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि यज्ञ भक्ति भावनाओं को संतुलित करने और अंतःकरण को शुद्ध करने का माध्यम है। यह दिन अत्यंत पावन है क्योंकि दादा गुरु स्वामी शिवानंद सरस्वती के जन्मदिवस पर लक्ष्मीनारायण यज्ञ का शुभारंभ हो रहा है और इसकी पूर्णाहुति परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती के जन्मदिन पर होगी।

गुरु परंपरा और यज्ञ का महत्व

स्वामी निरंजनानंद ने स्वामी शिवानंद सरस्वती के जीवन के दो प्रमुख आधार प्रेम और सेवा को बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी शिवानंद का प्रेम आसक्ति और अपेक्षा से मुक्त था, जबकि उनकी सेवा निःस्वार्थ भाव पर आधारित थी। उनके जीवन का संदेश था कि आध्यात्मिक साधना केवल स्वयं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज और पीड़ित मानवता के प्रति संवेदना और सेवा से भी जुड़ी होनी चाहिए। पादुका दर्शन में लक्ष्मीनारायण यज्ञ की परंपरा वर्ष 2011 में शुरू हुई थी और यह इस परंपरा का 16वां महायज्ञ है।

यज्ञ की भावना और साधना यात्रा

यज्ञ की भावना केवल भौतिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में शुभता, मांगल्य, शांति और आध्यात्मिक चेतना के विस्तार से भी जुड़ी है। यज्ञ की अग्नि में दी जाने वाली आहुति देवता के प्रति समर्पण और लोकमंगल की कामना का प्रतीक मानी जाती है। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से ऊपर उठकर प्रेम, सेवा, संयम और करुणा को जीवन में स्थान देना ही यज्ञ की अंतर्धारा को सार्थक करता है। यह परंपरा गुरु से शिष्य और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक साधना, सेवा और प्रेम के संदेश को आगे बढ़ाती है।

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