मुजफ्फरनगर में हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, अधिवक्ता ने एसएसपी से की एफआईआर दर्ज कराने की मांग

Prakriti Singh21 August 20264 min read29 viewsUttar Pradesh
मुजफ्फरनगर में हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, अधिवक्ता ने एसएसपी से की एफआईआर दर्ज कराने की मांग

मुजफ्फरनगर में हिंदू देवी-देवताओं को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। जिला बार संघ मुजफ्फरनगर के अधिवक्ता गुलाब सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर इस्लामिक वक्ता जर्जिस अंसारी उर्फ मुल्ला जर्जिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिहार के कटिहार जिले में आयोजित एक सभा के दौरान वक्ता ने हिंदू धर्म के आराध्य देवी-देवताओं को लेकर ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में वैमनस्य फैला है।

एफआईआर और सोशल मीडिया से वीडियो हटाने की मांग

अधिवक्ता ने एसएसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि वह जिला बार संघ मुजफ्फरनगर में अधिवक्ता हैं तथा हिंदू धर्म को मानते हैं। शिकायत के अनुसार 22 जुलाई 2026 को बिहार के कटिहार जिले में आयोजित एक इस्लामिक सभा को संबोधित करते हुए वक्ता ने भगवान शिव और ब्रह्मा जी को लेकर कथित तौर पर अपशब्दों का प्रयोग किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि टिप्पणी सामान्य बयान नहीं थी बल्कि जानबूझकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया जिससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे और समाज में धार्मिक वैमनस्य तथा तनाव पैदा हो। अधिवक्ता ने पुलिस से मामले को गंभीरता से लेते हुए कथित बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि सभा के दौरान दिए गए कथित बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग बाद में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार कथित वीडियो को यूट्यूब और फेसबुक समेत विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों पर साझा किया गया जिससे बड़ी संख्या में लोगों तक विवादित सामग्री पहुंची। अधिवक्ता का कहना है कि यदि धार्मिक विषयों पर आपत्तिजनक सामग्री को सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार प्रसारित किया जाता है तो इससे विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने पुलिस से वीडियो के मूल स्रोत, उसे अपलोड करने वाले व्यक्ति और उसे आगे प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया चैनलों की जांच कराने की मांग की है।

धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और तनाव की आशंका

शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि कथित टिप्पणी से सनातन संस्कृति और हिंदू आस्था को मानने वाले लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के बयानों से समाज में आपसी सौहार्द प्रभावित हो सकता है और विभिन्न समुदायों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटवाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। अधिवक्ता गुलाब सिंह ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया है कि संबंधित वक्ता पूर्व में भगवान श्रीकृष्ण को लेकर भी कथित रूप से आपत्तिजनक बयान दे चुका है। प्रार्थना पत्र में लखनऊ के हजरतगंज थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने प्रार्थना पत्र में वाराणसी की अदालत से दुष्कर्म के एक मामले में संबंधित व्यक्ति को दोषी करार दिए जाने का भी दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी सत्यता संबंधित अभिलेखों तथा पुलिस जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग

अधिवक्ता ने एसएसपी से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लागू आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने अपनी शिकायत में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत भी कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने कथित वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले लोगों और चैनलों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से यह भी अनुरोध किया है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध कथित वीडियो की तकनीकी जांच कराई जाए। वीडियो वास्तविक है या उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है, इसे लेकर भी जांच किए जाने की मांग की गई है। उनका कहना है कि जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति और कथित वीडियो को प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। अधिवक्ता ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भी भेजी है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग की है। अब इस शिकायत के बाद पुलिस स्तर पर मामले की जांच और कानूनी राय के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर से पुष्टि होना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित बयान का वास्तविक संदर्भ क्या था, वीडियो कितना प्रमाणिक है और संबंधित सामग्री के आधार पर किन कानूनी धाराओं में कार्रवाई बनती है।

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