मुजफ्फरनगर में करोड़ों की संपत्ति का 13 लाख में फर्जी विक्रय अनुबंध कराने का आरोप, एसएसपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज

Prakriti Singh21 August 20265 min read53 viewsUttar Pradesh
मुजफ्फरनगर में करोड़ों की संपत्ति का 13 लाख में फर्जी विक्रय अनुबंध कराने का आरोप, एसएसपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज

नोएडा निवासी दो भाइयों ने मुजफ्फरनगर में करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति का फर्जी विक्रय अनुबंध कराने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मकान बेचने के लिए रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे थे दोनों भाई
शिकायतकर्ता अनिल कुमार त्यागी और सुनील कुमार त्यागी, दोनों नोएडा निवासी हैं। दोनों भाइयों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि ग्राम बहेड़ी निवासी नपेंद्र और गौरव त्यागी उनसे संपर्क में आए थे। आरोपियों ने ग्राम बेगमपुर स्थित खसरा संख्या 625 की संपत्ति खरीदने का प्रस्ताव रखा था, जिसे दोनों भाइयों ने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने मकान संख्या 388, ब्रह्मपुरी, मुजफ्फरनगर खरीदने की इच्छा जताई। मकान बेचने में सहमति होने के कारण दोनों भाई 10 जुलाई 2026 को रजिस्ट्री कार्यालय सदर द्वितीय, मुजफ्फरनगर पहुंचे।

मकान के विक्रय अनुबंध के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का आरोप
10 जुलाई को मकान संख्या 388, ब्रह्मपुरी के संबंध में दोनों भाइयों के नाम से पंजीकृत विक्रय अनुबंध संख्या 10506 और 10508 निष्पादित किए गए। आरोप है कि इसी दौरान आरोपियों ने रजिस्ट्री कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर ग्राम बेगमपुर स्थित खसरा संख्या 625 की संपत्ति के संबंध में भी पहले से फर्जी विक्रय अनुबंध तैयार करा रखे थे। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी और उनसे डिजिटल फोटो एवं अंगूठे के निशान यह कहकर दोबारा लिए गए कि पहले लिए गए फोटो और अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं आए हैं।

डिजिटल फोटो और अंगूठे के निशान का दुरुपयोग करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक वे आरोपियों की साजिश से अनजान थे और उनके कहने पर दोबारा डिजिटल फोटो व अंगूठे के निशान दे दिए। आरोप है कि इन्हीं का दुरुपयोग करते हुए ग्राम बेगमपुर स्थित संपत्ति के संबंध में विक्रय अनुबंध संख्या 10507 और 10510 पंजीकृत करा दिए गए। दोनों भाइयों का कहना है कि उन्होंने खसरा संख्या 625 की संपत्ति बेचने के लिए न तो कोई सहमति दी थी, न ही किसी विक्रय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए और न ही इस संपत्ति के बदले कोई रकम प्राप्त की।

16 जुलाई को सरकारी रिकॉर्ड से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
16 जुलाई 2026 को एक रिश्तेदार द्वारा सरकारी अभिलेख भेजे जाने पर दोनों भाइयों को पता चला कि रिकॉर्ड में ऐसा प्रदर्शित हो रहा है, जैसे उन्होंने ग्राम बेगमपुर स्थित अपनी संपत्ति का विक्रय अनुबंध कर दिया हो। जानकारी मिलने के बाद दोनों भाइयों को संदेह हुआ और उन्होंने 17 जुलाई को स्वयं तहसील एवं रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर मामले की जानकारी ली। इसके बाद उन्हें फर्जी विक्रय अनुबंधों की जानकारी हुई।

प्रमाणित प्रतियां निकलवाने पर हस्ताक्षर फर्जी होने का आरोप
18 जुलाई को उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय सदर द्वितीय से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कीं। उनका आरोप है कि दस्तावेजों पर प्रथम पक्षकार के रूप में दर्शाए गए उनके हस्ताक्षर वास्तविक नहीं हैं। तहरीर में यह भी दावा किया गया है कि अलग-अलग पृष्ठों पर हस्ताक्षरों का स्वरूप और शैली अलग है। शिकायतकर्ताओं ने इन हस्ताक्षरों की जांच फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और हस्तलेखन विशेषज्ञ से कराने की मांग की है।

स्टाम्प खरीद की तारीख को भी बनाया अहम आधार
ग्राम बेगमपुर स्थित खसरा संख्या 625 के फर्जी विक्रय अनुबंध के लिए स्टाम्प शुल्क 7 जुलाई 2026 को खरीदा गया था, जबकि वास्तविक रूप से बेचे जा रहे ब्रह्मपुरी के मकान के विक्रय अनुबंध के लिए स्टाम्प शुल्क 9 जुलाई 2026 को खरीदा गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि बेगमपुर की संपत्ति के संबंध में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की योजना पहले से बनाई गई थी।

सही पते की जगह पुराना पता दर्ज कराने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपियों के पास उनका वर्तमान और सही आवासीय पता उपलब्ध था, इसके बावजूद बेगमपुर की फर्जी रजिस्ट्री में उनका पुराना और गलत पता दर्ज कराया गया। उनका आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया, ताकि किसी प्रकार की सूचना या नोटिस उनके वास्तविक पते तक न पहुंच सके और फर्जीवाड़े का समय रहते खुलासा न हो।

एक ही चेक नंबर दो अलग अनुबंधों में दर्ज होने का दावा
शिकायतकर्ताओं ने फर्जीवाड़े के समर्थन में चेक नंबरों का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि बेगमपुर की संपत्ति के फर्जी विक्रय अनुबंध में भुगतान के लिए जिन चेक संख्या 184944 और 184942 का उल्लेख किया गया है, वही चेक नंबर ब्रह्मपुरी स्थित मकान के वास्तविक विक्रय अनुबंधों में भी दर्ज हैं। दोनों भाइयों का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि बेगमपुर की संपत्ति के लिए उन्हें कोई अलग भुगतान नहीं किया गया।

13 लाख रुपये में करोड़ों की संपत्ति हड़पने की साजिश का आरोप
शिकायत में दोनों भाइयों ने दावा किया है कि ग्राम बेगमपुर स्थित खसरा संख्या 625 की संपत्ति करोड़ों रुपये मूल्य की है, जबकि फर्जी दस्तावेजों में इसे मात्र 13 लाख रुपये में विक्रय अनुबंध किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि दोनों संपत्तियां अलग-अलग स्थानों पर हैं और उनका क्षेत्रफल, स्वरूप व बाजार मूल्य भी अलग है। उनके मुताबिक बेगमपुर की संपत्ति के लिए कभी बातचीत, मूल्य निर्धारण या भुगतान जैसी कोई प्रक्रिया हुई ही नहीं।

रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग
मामले में शिकायतकर्ताओं ने आरोपियों के साथ-साथ रजिस्ट्री कार्यालय के संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और पंजीकरण कराने में कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। इसके अलावा शिकायत में गौरव नेहरा पुत्र कंवरपाल सिंह निवासी बढ़ाई खुर्द सहित अन्य अज्ञात सहयोगियों के भी साजिश में शामिल होने का संदेह जताया गया है।

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