मुजफ्फरपुर गैस ब्लास्ट: 'हमने चेतावनी दी थी पर नहीं माने', एक की मौत
मुजफ्फरपुर में पीएनजी पाइपलाइन फटने से बड़ा हादसा। एक की मौत और छह घायल। पीड़ित परिवार ने लापरवाही का आरोप लगाया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर में सोमवार को एक भीषण गैस विस्फोट हुआ, जिसने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया। पीएनजी (PNG) पाइपलाइन फटने से हुए इस धमाके में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
'सब कुछ राख हो गया, हमारी चेतावनी को किया गया नजरअंदाज'
हादसे से बचे एक पीड़ित परिवार ने बेहद दर्दनाक बयान देते हुए बताया कि उन्होंने इस खतरे के बारे में पहले ही चेतावनी दी थी। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने बार-बार आगाह किया था कि कुछ अनहोनी हो सकती है, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया।
पीड़ित ने रोते हुए कहा, "हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि कुछ ऐसा हो सकता है, हमने उनसे मिन्नतें की थीं, लेकिन सब बेकार रहा। अब सब कुछ राख हो चुका है। मेरी दोनों बहुओं के पैरों में गंभीर चोटें आई हैं, उनके शरीर पर गहरे जख्म और खरोंचें हैं।"
जेसीबी मशीन से पाइपलाइन हुई क्षतिग्रस्त
मुजफ्फरपुर के जिला मजिस्ट्रेट कुमार गौरव ने मामले की शुरुआती जांच के हवाले से बताया कि यह हादसा ड्रेनेज (निकासी) निर्माण के लिए की जा रही खुदाई के दौरान हुआ। खुदाई में इस्तेमाल की जा रही एक जेसीबी मशीन ने गलती से पीएनजी पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे गैस का रिसाव शुरू हो गया और अंततः एक जोरदार विस्फोट हुआ।
घायलों की हालत नाजुक, अस्पताल में भर्ती
इस विस्फोट में घायल हुए छह लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घायलों में से कुछ का इलाज श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में चल रहा है, जबकि चार लोग सदर अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि SKMCH में भर्ती दो घायलों में से एक की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि उसके शरीर का 80 प्रतिशत हिस्सा जल चुका है। वहीं, दूसरे घायल का 20 प्रतिशत हिस्सा जला है और उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है।
जांच के आदेश और लापरवाही पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने इस घटना की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि गैस रिसाव शुरू होने और विस्फोट के बीच लगभग 25 से 30 मिनट का समय था।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा:
"चूंकि गैस रिसाव और विस्फोट के बीच पर्याप्त समय होने के बावजूद स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जा सका, इसलिए हम इस पूरे घटनाक्रम की गहन समीक्षा करेंगे। जांच के बाद एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी और जो भी व्यक्ति या विभाग इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"